Jaun Elia: तो इसलिए गर्मी में कंबल और रात में धूप का चश्मा पहन लेते थे जौन एलिया

जौन का मिजाज बुनियादी तौर पर नाराज था। ये नाराजगी थी समाज से, अपने दौर से, रिश्तों से और सबसे ज्यादा खुद से। जौन अकसर कहते भी थे कि मुझसे मेरी जिंदगी की कोई कीमत वसूल नहीं हो पाई।

एक ही तो हवस रही है हमें, अपनी हालत तबाह की जाए। ये शेर है जौन एलिया का। ये एक शेर उनकी जिंदगी बयां करने को काफी है। उर्दू शायरी की दुनिया में जौन एलिया एक ऐसा नाम थे, जिनकी शख्सियत जितनी रहस्यमयी थी, उतनी ही बागी भी। उनका मिजाज कभी किसी सीधी रेखा जैसा नहीं था। वह टूटा भी था, चुभता भी था, मुस्कुराता भी था और सवाल भी करता था। जौन एलिया को पढ़ेंगे तो आप खुद महसूस करेंगे कि आदमी सिर्फ कविता नहीं पढ़ रहा, बल्कि एक ऐसे शायर का हाल-ए-दिल सुन रहा है जो अंदर ही अंदर हर पल जलता और सुलगता रहता है।

Jaun Elia Biography in Hindi

जौन एलिया (Photo: Jaun Elia fan page)

मैं जो हूं 'जौन-एलिया' हूं जनाब

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