प्यार के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। कोई शहर बदल देता है, कोई देश, तो कोई अपना करियर। लेकिन ओडिशा के रहने वाले पी. के. महानंदिया ने जो किया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। उन्होंने अपनी प्रेमिका से किया वादा निभाने के लिए साइकिल पर भारत से स्वीडन तक का करीब 22 हजार किलोमीटर लंबा सफर तय कर लिया।
एक प्रेम कहानी ऐसी भी (AI Generated Image)
एक मुलाकात, जिसने जिंदगी बदल दी
यह कहानी 1975 की है। उस समय पी. के. महानंदिया दिल्ली के कॉलेज ऑफ आर्ट में पढ़ाई कर रहे थे। वे पढ़ाई के साथ-साथ कनॉट प्लेस में लोगों के पोर्ट्रेट बनाकर अपनी पढ़ाई का खर्च भी निकालते थे।
इसी दौरान स्वीडन की 19 वर्षीय युवती शार्लोट वॉन शेडविन भारत घूमने आईं। दिल्ली में किसी सड़क किनारे उन्हें महानंदिया पोट्रेट बनाते दिखे। वह उनसे अपना पोर्ट्रेट बनवाने पहुंचीं। पोर्ट्रेट बनाते-बनाते दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह मुलाकात दोस्ती, फिर प्यार में बदल गई।
ज्योतिष की भविष्यवाणी हुई सच
महानंदिया बचपन में एक ज्योतिषी की कही बात अक्सर याद करते थे। ज्योतिषी ने कहा था कि उनकी शादी किसी दूर देश की ऐसी लड़की से होगी, जो जंगलों की मालिक होगी और संगीत बजाने वाली होगी।
जब उन्होंने शार्लोट के बारे में जाना तो उन्हें लगा कि यह भविष्यवाणी सच होती दिख रही है। शार्लोट एक समृद्ध स्वीडिश परिवार से थीं और वायलिन बजाने की शौकीन थीं।
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शार्लोट महानंदिया के गांव भी गईं। उनके परिवार से मिलीं। ओडिशा में कोणार्क मंदिर देखा। वहां से दिल्ली लौटीं। दिल्ली में दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली। वहीं कुछ दिन बाद समय आ गया शार्लोट के स्वीडन वापस लौटने का। जाते समय दोनों ने एक-दूसरे से जल्द मिलने का वादा किया।
महानंदिया ने वादा किया कि तुम जब भी कहेगी मैं स्वीडन पहुंच जाऊंगा। लेकिन यहां एक बड़ी समस्या थी। महानंदिया के पास हवाई जहाज का टिकट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए यूरोप जाना लगभग असंभव था।
फिर शुरू हुआ दुनिया का सबसे यादगार सफर
हार मानने के बजाय महानंदिया ने एक अलग फैसला लिया। उन्होंने एक साइकिल खरीदी और 1977 में भारत से स्वीडन के लिए निकल पड़े। यह सफर आसान नहीं था। रास्ते में उन्हें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, बुल्गारिया, यूगोस्लाविया, जर्मनी, ऑस्ट्रिया और डेनमार्क जैसे कई देशों से होकर गुजरना पड़ा।
कई बार खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी, तो कई जगह लोगों की मदद से खाना और ठहरने की व्यवस्था हुई। करीब चार महीने और तीन सप्ताह तक लगातार साइकिल चलाने के बाद वे आखिरकार स्वीडन पहुंच गए, जहां शार्लोट उनका इंतजार कर रही थीं।
आज भी साथ हैं दोनों
स्वीडन पहुंचने के बाद दोनों ने वहीं अपना जीवन शुरू किया। महानंदिया ने अपनी कला को आगे बढ़ाया और एक सफल कलाकार के रूप में पहचान बनाई। आज इस प्रेम कहानी को करीब 50 साल बीच चुके हैं। आज भी दोनों साथ हैं और दो बच्चों के पेरेंट बन चुके हैं।
भारत की मिट्टी से निकले महानंदिया ने प्यार के लिए साइकिल से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर दुनिया को यह दिखा दिया कि इरादे मजबूत हों, तो दूरी कभी भी रिश्तों के बीच दीवार नहीं बन सकती।
