Hasya Shayari in Hindi: रंगों का महापर्व होली का त्योहार दस्तक दे रहा है। जगह-जगह रंग और पिचकारियों से सजी दुकानें नजर आ रही हैं। लोग मस्ती के रंग में रंगने लगे हैं। दरअसल होली का त्योहार ही ऐसा होता है कि हर कोई मस्ती में डूब जाना चाहता है। इस खास दिन पर दुश्मन भी अपने बीच की सारी असहमतियां भुलाकर गले मिल जाते हैं। होली की मस्ती का रंग तब तक फीका रहता है जब तक इसमें हास्य और व्यंग का तड़का ना लगे। दुनिया के तमाम शायरों में हास्य पर एक से बढ़कर एक शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं कुछ हास्य शायरी हिंदी में:
Hasya Vyang Shayari (हास्य शायरी 2 लाइन)
1. कहा जो मैंने कि ' दिल चाहता है प्यार करूं'
तो मुस्कुरा के वो कहने लगे कि 'प्यार के बाद'
- अकबर इलाहाबादी
2. बेटे को चैक समझ लिया स्टेट-बैंक का
सम्धी तलाश करने लगे हाई रैंक का
- मुस्तफ़ा अली बेग
3. भरते हैं मेरी आह को ग्रामोफ़ोन में,
कहते हैं फ़ीस लीजिये और आह कीजिये
- अकबर इलाहाबादी
4. कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया
जब कोई तक़रीर की जलसे में लीडर बन गया
- अकबर इलाहाबादी
5. हम हाल उन्हें यूं दिल का सुनाने में लगे हैं,
कुछ कहते नहीं, पांव दबाने में लगे हैं
- 'हसरत' मोहानी
6. दावेदार बहुत थे, लेकिन कूच समय यह हाल हुआ,
जिससे पूछो वही पुकारे साथी ! पांव में छाला है।
- हसन आबिद
7. हक़ीक़त को छुपाया हम से क्या क्या उस के मेक-अप ने
जिसे लैला समझ बैठे थे वो लैला की माँ निकली
- राग़िब मुरादाबादी
8. इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया
- अकबर इलाहाबादी
9. अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से
लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से
- अकबर इलाहाबादी
10. बाल अपने बढ़ाते हैं किस वास्ते दीवाने
क्या शहर-ए-मोहब्बत में हज्जाम नहीं होता
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
उम्मीद करते हैं कि इन मशहूर शायरों की कलम से निकले हास्य के ये रंग आपको पसंद आए होंगे। अगर आपको वाकई इन शायरियों ने गुदगुदाया है तो आप इन्हें अपने दोस्तों और करीबियों के साथ शेयर भी कर सकते हैं। आप चाहें तो इन्हें आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी साझा कर सकते हैं।
