गुनाहों का देवता: अगर सुधा और चंदर आज के दौर में होते, तो क्या हो जाती उनकी शादी?

आज का समाज उस समय से ज्यादा खुला है। लड़का-लड़की दोस्त हो सकते हैं। साथ पढ़ सकते हैं। साथ काम कर सकते हैं। प्रेम स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन क्या लोग अपनी भावनाएं पहले से ज्यादा साफ कह पाते हैं?

हाल ही में नेटफ्लिक्स पर 'मुसाफिर कैफे' नाम की एक वेब सीरीज आई है। इस सीरीज के दो मुख्य पात्र है- सुधा और चंदर। ये दोनों नाम इन दिनों चर्चा में हैं। वैसे ये दोनों नाम साहित्य की दुनिया में पिछले 77 सालों से अधूरे प्रेम और त्याग का सबसे बड़े चेहरे के तौर पर अमर हैं। इन किरदारों को कलम के जादूगर धर्मवीर भारती ने अपने कालजयी उपन्यास 'गुनाहों का देवता' के लिए गढ़ा था।

gUNAHON KA DEVTA

क्या आज के दौर में एख हो जाते गुनाहों का देवता के सुधा और चंदर (AI Image)

गुनाहों का देवता में सुधा और चंदर एक-दूसरे से बेइंतहा प्रेम करते हैं, लेकिन अपने मन की बात कभी खुलकर नहीं कह पाते। चंदर, अपने गुरु डॉ. शुक्ला के प्रति सम्मान, सामाजिक मर्यादाओं और नैतिक दुविधाओं में इतना उलझा रहता है कि वह सुधा का हाथ मांगने का साहस नहीं जुटा पाता। दूसरी तरफ, सुधा भी परिवार की इच्छा के आगे अपने प्रेम के लिए विद्रोह नहीं करती और उसकी शादी किसी और से हो जाती है।

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