Gulzar Shayari on Love (गुलजार की शायरी दर्द भरी): मशहूर गीतकार, लेखक, निर्देशक और शायर गुलज़ार कोई शख्सियत नहीं बल्कि आजीवन साथ रहने वाला अहसास है। गुलजार अपनी नज़्मों में सीधे-सादे शब्दों से चौंका देने वाली तस्वीरें गढ़ते हैं। गुलजार की कलम में ऐसा जादू है कि कहीं तो पढ़ने वालों को अचानक काग़ज़ पर भारी-भरकम ख़याल दफनाये मिलते हैं और कहीं दिखाई देते हैं कर्ज़ की मिट्टी चबाते हुए किसान जो ख़ुदकुशी कर बैठते हैं। गुलजार की रचनाएं हमें जीवन के उस पहलू को भी बड़ी बारीकी से समझाती है जिसे बड़े से बड़े दार्शनिक भी बयां ना कर सकें। गुलजार की कई नज्में ऐसी हैं जिन्हें लोग कभी भूल नहीं पाए। गुलजार की कलम से निकले हजारों नगमों में से हम आपके लिए कुछ चुनिंदा शेर लाए हैं:
Gulzar Shayari in Hindi (गुलजार हिंदी शायरी)
1. आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई।
2. ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा।
3. शाम से आँख में नमी सी है,
आज फिर आप की कमी सी है।
4. वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इस की भी आदमी सी है।
5. आदतन तुम ने कर दिए वादे,
आदतन हम ने ए'तिबार किया।
6. जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ,
उस ने सदियों की जुदाई दी है।
7. कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है,
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है।
8. हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते।
9. कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,
आज की दास्ताँ हमारी है।
10. ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में,
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में।
11. जब भी ये दिल उदास होता है,
जाने कौन आस-पास होता है।
12. बीच आस्मां में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम…
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो
13. तेरा चेहरा ही लिये घूमता हूँ, शहर में तबसे
लोग मेरा नहीं, एहवाल तेरा पूछते हैं, मुझ से
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