Fati Edi ka Gharelu Upay (फटी एड़ियों का इलाज): हम अपने चेहरे और त्वचा की देखभाल तो पूरे ध्यान से करते हैं, लेकिन अक्सर पैरों की अनदेखी कर जाते हैं। इससे मौसम की मार का सीधा असर इन पर पड़ता है। गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी लेकर आता है। इनसे बचने के लिए खुले सैंडल, चप्पल और गर्म हवाओं के सीधे संपर्क में रहने के कारण सबसे ज्यादा असर हमारी एड़ियों पर पड़ता है। नमी की कमी और लगातार चलने-फिरने से एड़ियां सूखने लगती हैं और धीरे-धीरे फटने लगती हैं। फटी एड़ियां न सिर्फ देखने में खराब लगती हैं, बल्कि कई बार उनमें दर्द और जलन भी होने लगती है। इनसे बचने के लिए आयुर्वेद में कई घरेलू उपाय हैं, जो गर्मियों में आपकी एड़ियों को फटने से बचाएंगे।
फटी एड़ियों पर क्या लगाएं
फटी एड़ियों पर क्या लगाएं
- फटी एड़ियों के इलाज के लिए नारियल तेल और कपूर का मिश्रण एक रामबाण उपाय माना जाता है। नारियल तेल त्वचा को गहराई तक नमी देता है और उसे मुलायम बनाता है, जबकि कपूर में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो संक्रमण से बचाते हैं और जलन को शांत करते हैं। दोनों को मिलाकर एड़ियों पर लगाने से दरारें जल्दी भरने लगती हैं और त्वचा स्वस्थ बनती है। यह मिश्रण रात को सोने से पहले लगाने पर बेहतर परिणाम देता है।
- गुनगुने पानी में नमक और नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर पैर भिगोना भी असरदार घरेलू उपाय है। गुनगुना पानी एड़ियों की सख्त त्वचा को नरम करता है, जबकि नमक उसमें जमी गंदगी और मृत त्वचा को हटाने में मदद करता है। नींबू का रस प्राकृतिक एंटीसेप्टिक होता है, जो त्वचा को साफ और ताजगीभरा बनाता है। रोजाना 15-20 मिनट तक यह प्रक्रिया अपनाने से एड़ियों में नमी बनी रहती है।
- फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए देसी घी या वैसलीन लगाना एक सरल उपाय है। साफ एड़ियों पर देसी घी या वैसलीन की मोटी परत लगाएं और फिर मोजे पहन लें। ऐसा करने से पूरी रात एड़ियों को पोषण मिलता है और यह मॉइस्चराइज का काम करता है।
- वहीं केला भी असरदार उपचार है। मैश हुए केले को एड़ियों पर अच्छी तरह लगाएं और इसे लगभग 15 मिनट तक के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से पैर धो लें। इस उपाय को सप्ताह में दो बार करने से एड़ियां स्वस्थ और सुंदर दिखने लगती हैं।
- एलोवेरा जेल में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण एड़ियों को संक्रमण से बचाते हैं और उसे भीतर से ठीक करने में मदद करते हैं। रात को सोने से पहले एलोवेरा जेल अच्छी तरह लगाएं और मोजे पहन लें। इसके नियमित उपयोग से एड़ियां मुलायम, चिकनी और स्वस्थ बनती हैं।
क्या कहता है आयुर्वेद
अमेरिकी ऑन लाइन पत्रिका एनआईएच ने कुछ समय पहले एक शोध पत्र प्रकाशित किया है जिसमें पैरों की दरारों का जिक्र है। आयुर्वेद में पैर की दरारों (फटे पैर) को क्षुद्र कुष्ठ (त्वचा के छोटे रोग) का नाम दिया गया है। जिसे एड़ी की दरार के रूप में भी जाना जाता है। इसे पैर की आम समस्या बताया गया है जिसमें पैर की एड़ी का रंग पीला हो जाता है। कठोर त्वचा का विकास होता है, पैरों में दर्द, रक्तस्राव या खुजली के साथ दरारें और सख्त हो जाती हैं। ऐसे में ऊपर बताए गए घरेलू उपाय आपको एड़ियों को नर्म और स्वस्थ रखने में मददगार हो सकते हैं।
इनपुट : आईएएनएस
