दास्तान-ए-उस्ताद: जब जलेबी ना मिलने पर गलत राग बजाने लगे बिस्मिल्ला खां, बेहद रोचक है किस्सा

Ustad Bismillah Khan: बिस्मिल्ला खां हमेशा कहते थे कि मेरे लिए शहनाई इबादत है। वह इकलौते कलाकार थे, जिन्हें भारत के चारों सर्वोच्च नागरिक सम्मान (पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न) से नवाजा गया। आज दास्तान-ए-उस्ताद में पढ़े शहनाई के जादूगर बिस्मिल्ला खां का रोचक किस्सा।

Bismillah Khan: बनारस की गलियों में पले-बढ़े बिस्मिल्ला खां का नाम आते ही कानों में शहनाई के मधुर गूंजते सुर उतर आते हैं। वह शहनाई के ऐसे फनकार थे कि उनकी सांसें भी सुरों में डूबी लगती थीं। शहनाई को मंदिरों की चारदीवारी से निकाल अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का श्रेय भी उस्ताद बिस्मिल्ला खां को ही जाता है। उनकी साधना का आलम ऐसा था कि जब वो शहनाई बजाते तो सुनने वाले रूहानी सफर पर निकल जाते। बिस्मिल्ला खां हमेशा कहते थे कि मेरे लिए शहनाई इबादत है। वह इकलौते कलाकार थे, जिन्हें भारत के चारों सर्वोच्च नागरिक सम्मान (पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न) से नवाजा गया।

Bismillah Khan

उस्ताद बिस्मिल्ला खां (Photos: PTI)

बिस्मिल्ला खां के रोचक किस्से

बिस्मिल्ला खां जितने बड़े फनकार थे उतने ही हाजिर जवाब भी थे। उनकी हाजिर जवाबी के कई किस्से मशहूर हैं। ऐसा ही एक किस्सा है जब उन्होंने जलेबी ना मिलने के कारण शहनाई से गलत सुर बजाने लगे। हालांकि उनका कद इतना बड़ा था कि किसी ने उन्हें टोकने की हिम्मत नहीं की। आइए जानते हैं कि आखिर क्या था पूरा किस्सा:

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