Bhagavad Gita Benefits: आज 1 दिसंबर को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। मान्यता है कि आज के ही दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को जो 700 श्लोकों का उपदेश दिया, वही आज दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा और सराहा जाने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है।
बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी इसे पढ़ते हैं और कई CEO अपनी डेस्क पर गीता रखते हैं और आम इंसान से लेकर संत-महात्मा तक इसे जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। रोजाना सिर्फ 10-15 मिनट गीता पढ़ने से जीवन में जो चमत्कारिक बदलाव आते हैं, वे किसी जादू से कम नहीं हैं। माना जाता है कि गीता का डेली पाठ आपको अद्भुत लाभ दिला सकता है। आइए जानते हैं कि गीता पाठ से क्या लाभ मिलते हैं?
डर और चिंता हमेशा के लिए खत्म
गीता का दूसरा अध्याय ही 'अथातो ब्रह्म जिज्ञासा' की तरह डर को जड़ से खत्म कर देता है। 'नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः' जैसे श्लोक आत्मा के अमर होने का बोध कराते हैं। रोज पाठ करने से मौत का डर, नौकरी जाने का डर, असफलता का डर सब गायब हो जाता है।
आत्मविश्वास छूने लगता है आसमान
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता तब सुनाई थी, जब उन्होंने कुरुक्षेत्र में महारथियों के के सामने युद्ध करने से मना कर दिया था। उनका आत्मविश्वास कमजोर हो चुका था, लेकिन गीता के ज्ञान से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने युद्ध किया व सफलता पाई।
कई गुना बढ़ जाती है फैसले लेने की ताकत
गीता कर्मयोग सिखाती है। इससे शिक्षा मिलती है कि हमेशा कर्म करते रहना चाहिए और किसी भी प्रकार से फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। ऑफिस में प्रमोशन चाहिए या बिजनेस में बड़ा रिस्क लेना हो। आप फोकस से फैसला कर सकते हैं।
गुस्सा और तनाव होता है कंट्रोल
तीसरे अध्याय में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जिसका मन और इंद्रियां वश में हैं, वही सबसे बड़ा योद्धा है। रोज गीता पढ़ने से गुस्सा कंट्रोल में आता है। इससे व्यक्ति मृदुभाषी बनता है।
अपने आप आ जाती है रिश्तों में मिठास
गीता में भगवान कहते हैं 'सर्वं विश्वेन संनादति' यानी सबमें मुझे ही देखो। जब आप रोज यह पढ़ते हैं तो हर इंसान में भगवान नजर आने लगते हैं। मां-बाप, पति-पत्नी, बच्चे, दोस्त – सबके साथ प्यार और सम्मान बढ़ जाता है।
दिमाग हो जाता है शांत
अगर दिमाग शांत नहीं रहता है तो डेली गीता का पाठ करना शुरू कर दें। इससे आपके मन को शांति मिलेगी और दिमाग शांत रहने लगेगा।
छूटने लगती हैं बुरी आदतें
गीता के पाठ से धीरे-धीरे बुरी आदतें छूटने लगती हैं। गीता आपको आत्मसंयम की ट्रेनिंग देती है, इससे आप खुद पर कंट्रोल करना सीख जाते हैं।
ऐसे करें गीता का पाठ
सुबह स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर एक आसन पर बैठें। गीता को लाल या पीले कपड़े में लपेटकर रखें, पाठ के समय ही खोलें। एक अध्याय पूरा पढ़ें, बीच में अधूरा न छोड़ें सिर्फ 10-15 मिनट भी काफी हैं । रोज एक अध्याय या 10-15 श्लोक का पाठ करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
