बच्चों का माता-पिता से बहस करना हमेशा गलत नहीं! तारा सुतारिया की बात से रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी सहमत

बच्चे अगर माता-पिता से अपनी बात पर असहमति जताते हैं, तो हर बार इसे बदतमीजी समझना जरूरी नहीं। सही तरीके से की गई बहस बच्चों को अपनी बात रखने, दूसरों को सुनने और सम्मान के साथ असहमति जताने की सीख दे सकती है।

घर में बच्चे और माता-पिता हर बात पर एक जैसा सोचें, ऐसा जरूरी नहीं है। बच्चे बड़े होते हैं तो उनकी अपनी पसंद, सवाल और राय बनने लगती है। ऐसे में कभी-कभी उनका मम्मी-पापा की बात से असहमत होना या बहस करना स्वाभाविक है। लेकिन हमारे घरों में अक्सर बहस को तुरंत बदतमीजी, जिद या अनुशासन की कमी मान लिया जाता है।

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