Butterfly Pea Flower Tea Recipe And Health Benefits : आजकल वजन बढ़ना और पेट से जुड़ी परेशानियां आम हो गई हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण कम फिजिकल एक्टिविटी और गलत खानपान से जुड़ी आदतें हैं। इस आदतों के चलते बॉडी में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे फैट बर्न नहीं हो पाता है और यह समस्या मोटापे और पेट की जिद्दी चर्बी के रूप में दिखाई देती है। अगर आप भी इस परेशानी से घिरे हुए हैं तो आप अपनी डेली डाइट में नॉर्मल दूध वाली चाय की जगह नीली चाय का उपयो कर सकते हैं। यह नीली चाल आपके रिफ्रेशमेंट देने के साथ ही आपकी हेल्थ को भी अच्छा रखेगी। इससे आपकी गट हेल्थ भी बेहतर होगी और मेटाबॉलिज्म भी सुधरेगा, जिससे जिद्दी चर्बी से निजात मिलेगी।
ब्लू टी कैसे बनाएं (Image AI Generated and Newsroom Verified)
अपराजिता के नीले फूलों से बनने वाली इस चाय का रंग बेहद आकर्षक होता है। इसे बटरफ्लाई पी फ्लावर टी भी कहा जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। ब्लू टी एक मेटाबॉलिज्म बेहतर करने, वजन मैनेज करने और पाचन तंत्र को सपोर्ट करने वाली हर्बल ड्रिंक है।
कैसे बनाएं ये ब्लू टी
नीली चाय बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती है।
सामग्री
- 1 कप पानी
- 4 से 5 ताजे या सूखे अपराजिता के नीले फूल
- 1 चम्मच शहद
- कुछ बूंद नींबू का रस
ऐसे बनाएं नीली चाय
सबसे पहले एक पैन में एक कप पानी गर्म करें। पानी में अच्छी तरह उबाल आने के बाद इसमें 4 से 5 अपराजिता के फूल डाल दें।
अब गैस की आंच धीमी कर दें और इसे करीब 3 से 5 मिनट तक पकने दें। इस दौरान फूलों का रंग पानी में उतर जाएगा और पानी गहरे नीले रंग का हो जाएगा।
अब गैस बंद कर दें और चाय को छानकर कप में निकाल लें। इसमें स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिला सकते हैं। नीली चाय को और खास बनाने के लिए इसमें कुछ बूंद नींबू का रस डालें। नींबू डालते ही इसका रंग नीले से बैंगनी हो जाता है।
मोटापा कम करने में मदद करती है नीली चाय
वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए नीली चाय एक अच्छा हर्बल विकल्प है। इसे रोजाना की डाइट में शामिल करने से मेटाबॉलिज्म को बेहतर रखने में मदद मिलती है। मेटाबॉलिज्म बेहतर रहने से शरीर में कैलोरी इस्तेमाल करने की प्रक्रिया बेहतर तरीके से चलती है।
अपराजिता के फूलों में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में फैट और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से ब्लू टी को वजन नियंत्रित करने वाली डाइट में शामिल किया जाता है।
पेट की गैस और भारीपन में राहत
खाना खाने के बाद पेट भारी रहना, पाचन धीमा होना या गैस की शिकायत होने पर भी नीली चाय पी जा सकती है। यह पेट को हल्का रखने में मदद करती है और पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट करती है। अगर भोजन के बाद पेट भारी महसूस होता है तो हल्की नीली चाय को रूटीन में शामिल किया जा सकता है। इसमें नींबू की कुछ बूंदें डालने से इसका स्वाद भी बेहतर हो जाता है।
पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद
नीली चाय को पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है। अपराजिता के फूलों में मौजूद प्राकृतिक कंपाउंड पाचन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सपोर्ट करते हैं। रोजाना एक कप ब्लू टी लेने से डाइट में एक हल्का और कैफीन रहित हर्बल पेय शामिल हो जाता है। इसे सुबह या शाम लिया जा सकता है।
शरीर को मिलते हैं एंटीऑक्सीडेंट
अपराजिता के फूलों का नीला रंग उसमें मौजूद प्राकृतिक एंथोसाइनिन पिगमेंट के कारण होता है। ये एंटीऑक्सीडेंट गुणों से जुड़े होते हैं। ब्लू टी को डाइट में शामिल करने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। यही वजह है कि इसे हेल्दी हर्बल ड्रिंक के रूप में भी पसंद किया जाता है।
कब पिएं नीली चाय
वजन नियंत्रित करने के लिए नीली चाय को सुबह या शाम लिया जा सकता है। इसे चीनी वाली चाय या ज्यादा कैलोरी वाले पेय की जगह लेने से डाइट में अतिरिक्त कैलोरी कम करने में मदद मिलती है। सुबह हल्की ब्लू टी पीना पसंद करते हैं तो इसे नाश्ते के आसपास लिया जा सकता है। शाम के समय भी एक कप नीली चाय ली जा सकती है।
पेट के लिए नीली चाय कब पिएं
पेट भारी होने या पाचन को हल्का रखने के लिए भोजन के कुछ समय बाद नीली चाय ली जा सकती है। इसे हल्का बनाकर पीना ज्यादा अच्छा रहता है। नींबू डालकर पीने से इसका स्वाद बढ़ जाता है और नीली चाय का रंग भी खूबसूरत बैंगनी हो जाता है।
नीली चाय में चीनी डालें या शहद
वजन मैनेज करने के लिए नीली चाय में ज्यादा चीनी डालने से बचें। हल्का मीठा स्वाद चाहिए तो एक चम्मच शहद मिलाया जा सकता है।
बिना चीनी की नीली चाय भी आसानी से पी जा सकती है और इसका प्राकृतिक स्वाद हल्का और सुगंधित रहता है।
दिन में कितनी बार पिएं
नीली चाय को रोजाना एक से दो कप लिया जा सकता है। इसे अपनी सामान्य हर्बल ड्रिंक की तरह सुबह या शाम के समय लिया जा सकता है। अगर पहली बार ब्लू टी पी रहे हैं तो शुरुआत एक कप से करना बेहतर रहता है।
