बेगम विलायत महल की भूली-बिसरी कहानी, जानें दिल्ली रेलवे स्टेशन से मलचा पैलेस तक का रहस्य

बगुम विलायत महल की कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अपना राजसी दरबार स्थापित किया। वह खुद को नवाब वाजिद अली शाह की वंशज मानती थीं और उन्होंने अपने परिवार की संपत्ति की वापसी की मांग की। उनके जीवन में संघर्ष और आत्मीयता का गहरा संबंध था, जो उन्हें इतिहास से जोड़े रखता था। 1970 के दशक में, उन्होंने दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कई वर्षों तक रहने का निर्णय लिया, जहां उनकी उपस्थिति ने लोगों का ध्यान खींचा। बाद में, उन्हें मलचा महल आवंटित किया गया, लेकिन वहां की जीवनशैली बेहद कठिन थी। अंततः, 1993 में, उन्होंने आत्महत्या कर ली, जो उनकी दुखद कहानी का अंत था। आज, मलचा महल एक भूतिया खंडहर के रूप में जाना जाता है, जहां लोग अजीब आवाजें सुनने का दावा करते हैं।

दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र में एक खंडहर है, जिसे मलचा महल के नाम से जाना जाता है। यह महल न केवल अपने अतीत के लिए जाना जाता है, बल्कि इसके साथ जुड़ी हुई बगुम विलायत महल की कहानी भी अद्भुत है। बगुम ने दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अपने जीवन का एक अनोखा अध्याय लिखा, जहां उन्होंने VIP प्रतीक्षालय को अपना दरबार बना लिया था। वह खुद को नवाब वाजिद अली शाह की वंशज मानती थीं, और उनकी यह पहचान उनके जीवन के हर पहलू में झलकती थी।

बेगम विलायत महल की कहानी (Images: Wikimedia Commons, Wikipedia)

1970 के दशक में, बगुम अपने दो बच्चों और कुत्तों के साथ दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बैठी रहती थीं। उनके द्वारा की गई मांगें बेहद स्पष्ट थीं — उन्हें अपने पूर्वजों की संपत्ति और सम्मान की वापसी चाहिए थी। बगुम ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, और उनकी यह अनोखी उपस्थिति लोगों के लिए एक रहस्य बनी रही। उनके जीवन के दौरान, उन्होंने स्टेशन पर लगभग दस साल बिताए, जहां उनकी उपस्थिति ने कई यात्रियों का ध्यान खींचा।

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