Ayurvedic Summer hair Care Tips: गर्मियां आते ही बालों से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं। किसी के बाल ज्यादा टूटने लगते हैं, तो किसी को स्कैल्प में चिपचिपाहट और खुजली परेशान करने लगती है। तेज धूप, पसीना, धूल और बार-बार बाल धोने की आदत धीरे-धीरे बालों को कमजोर बना सकती है। ऐसे में ज्यादातर लोग नया शैंपू या महंगे हेयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, लेकिन हर बार सिर्फ बाहरी देखभाल से फायदा मिले, ऐसा जरूरी नहीं है। हेल्थ इंफ्लुएंसर और आयुर्वेदाचार्य दीक्षा भावसार के मुताबिक आयुर्वेद में बालों की सेहत (ayurvedic hair care) को शरीर के अंदरूनी संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। यानी अगर पाचन, नींद और शरीर का पोषण सही रहेगा, तो उसका असर बालों पर भी दिखाई देगा। गर्मियों में बालों को हेल्दी रखने के लिए कुछ छोटी-छोटी आदतें काफी मदद कर सकती हैं।
गर्मियों में बालों को हेल्दी रखने के आयुर्वेदिक उपाय
गीले बाल बांधना बालों की जड़ों को कर सकता है कमजोर
अक्सर लोग जल्दी के चक्कर में गीले बालों को तुरंत बांध लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद के हिसाब से यह आदत बालों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। जब गीले बाल लंबे समय तक बंधे रहते हैं, तो स्कैल्प में नमी और गर्मी फंस जाती है। इससे बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और फंगल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है। कोशिश करें कि बाल पूरी तरह सूखने के बाद ही बांधें।
सिर्फ शैंपू बदलने से नहीं रुकता हेयर फॉल
गर्मियों में लोग ऑयली स्कैल्प की वजह से बार-बार शैंपू करने लगते हैं। इससे कुछ समय के लिए फ्रेश महसूस हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा शैंपू बालों का नेचुरल ऑयल कम कर देता है। डॉ. दीक्षा भावसार बताती हैं कि आयुर्वेद में बालों की गर्मी को अंदर से शांत करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसके लिए ठंडी तासीर वाले फूड्स और सही लाइफस्टाइल जरूरी मानी जाती है।
शरीर में पानी की कमी का असर बालों पर भी दिखता है
गर्मियों में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है। इसका असर बालों की हेल्थ पर भी पड़ सकता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में जरूरी पोषण की कमी बालों को कमजोर बना सकती है। ऐसे में भीगे हुए काले किशमिश, खजूर, तिल और पर्याप्त पानी लेना फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा तरबूज, खरबूजा और दूसरे मौसमी फल शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां बालों को दे सकती हैं नेचुरल मजबूती
आयुर्वेद में भृंगराज, ब्राह्मी, जटामांसी और आंवला जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। माना जाता है कि ये स्कैल्प को ठंडक पहुंचाने और बालों को मजबूत रखने में मदद कर सकती हैं। खासतौर पर गर्मियों में ये जड़ी-बूटियां बालों को अंदर से पोषण देने का काम करती हैं।
देर रात तक जागना भी बन सकता है हेयर फॉल की वजह
अगर आप रोज देर रात तक जागते हैं, तो इसका असर सिर्फ शरीर की थकान पर नहीं, बल्कि बालों की सेहत पर भी पड़ सकता है। आयुर्वेद के अनुसार रात की नींद शरीर की रिपेयरिंग के लिए बहुत जरूरी होती है। लगातार कम नींद लेने से शरीर में पित्त बढ़ सकता है, जिससे बाल कमजोर होने लगते हैं। इसलिए समय पर सोने की आदत बालों के लिए भी जरूरी मानी जाती है।
कब्ज और एसिडिटी को हल्के में न लें
आयुर्वेदाचार्य डॉ. दीक्षा भावसार के मुताबिक लगातार कब्ज या एसिडिटी की समस्या भी बाल झड़ने की एक वजह हो सकती है। जब पाचन सही नहीं रहता, तो शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। इसका असर धीरे-धीरे बालों पर दिखने लगता है। साथ ही आयुर्वेद में लकड़ी की कंघी इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे बालों में कम घर्षण होता है और टूटने की संभावना कम रहती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की हेयर या स्कैल्प समस्या होने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
