Cricket Gyan: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2024 के मुकाबले अब अपने आखिरी चरण में हैं और आप लोगों ने इन मुकाबलों में एक से बढ़कर एक खिलाड़ियों के असाधारण प्रदर्शन देखे होंगे। आज के समय में तो खिलाड़ी उड़कर बाउंड्री के पार से कैच लपककर बल्लेबाज को पवेलियन भेज देते हैं और कई बार तो इस तरह के कैच पूरा मैच ही बदल देते हैं, लेकिन आप लोगों ने कभी यह गौर किया है कि खिलाड़ी जब कैच पकड़ता है तो अपने हाथों को पीछे ले जाता है। अगर आपने अब तक इस पर गौर नहीं किया है तो क्रिकेट देखते समय जरूर ध्यान दीजिएगा और अगर किया है तो हम आपको इसके पीछे का विज्ञान समझाते हैं।
कैच के पीछे का अजब गजब साइंस
कैच के पीछे का विज्ञान क्या है?
यह कोई रॉकेटसाइंस नहीं है, बल्कि एक साधारण सा सवाल है, जो यकीनन आप लोगों ने बचपन में पढ़ा होगा। हां, यह जरूर है कि आप अभी उसे याद नहीं कर पा रहे हैं। आपने न्यूटन के गति के दूसरे नियम को तो पढ़ा ही होगा कि किसी भी वस्तु पर लगाया जाने वाला बल (Force) वस्तु के रैखिक संवेग (Linear Momentum) के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
ऐसे में फोर्स ∝ मोमेंटम में परिवर्तन/समय
कैच ही जिताते हैं मैच (फाइल फोटो)
यह तो फॉर्मूला हो गया, लेकिन अब हम आपको आसान शब्दों में इसके बारे में बताते हैं। जब एक गेंद कैच के लिए आती है तो उसमें फोर्स होता है और अगर खिलाड़ी उसको वैसे ही पकड़ लेता है तो समय कम, लेकिन रिस्पॉन्स फोर्स ज्यादा लगता है। ऐसे में फोर्स को कम करने के लिए खिलाड़ी अक्सर अपने हाथों को पीछे खींचते हैं जिसकी वजह से गेंद पकड़ने में लगने वाला समय बढ़ ज्याता है और रिस्पॉन्स फोर्स भी कम हो जाता है।
क्रिकेट मैच और कैच
खिलाड़ी नहीं होते हैं इंजर्ड
क्रिकेट फील्ड में अक्सर आपने खिलाड़ियों को इंजर्ड होते हुए देखा होगा। कई बार गलत टेकनिक से कैच पकड़ने की वजह से भी खिलाड़ियों को चोट लग जाती हैं, लेकिन बहुत से असाधारण कैच भी आप लोगों ने देखें होंगे जिन्हें लेने के बावजूद खिलाड़ियों को जरा सा भी दर्द का अहसास नहीं होता है और वह मैच के दौरान कैच को सेलीब्रेट कर रहे होते हैं। इसके पीछे का साइंस आप लोगों को हम पहले ही बता चुके हैं। हाथ पीछे खींचकर कैच लेने से हाथ पर लगने वाला फोर्स बेहद कम हो जाता है जिसकी वजह से खिलाड़ी इंजर्ड नहीं होते हैं।
