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साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण: आसमान में बनेगा 'रिंग ऑफ फायर'; जानें क्या है इसे देखने का सही तरीका

17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026) लगने जा रहा है और यह बेहद खास भी होगा। इस विशेष ग्रहण जब उरूज पर होगा तो सूरज के दमकते किनारे दिखेंगे, इसीलिए ये रिंग ऑफ फायर भी कहलाता है। इसी बहाने आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण के बारे में, भारत में यह दिखाई देगा या नहीं, साथ ही जानेंगे सूर्य ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं और किसी भी सूर्य ग्रहण को देखने का सही तरीका क्या है।

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Photo : Times Now Digital
सूर्य ग्रहण देखने का क्या है सही तरीका
Authored by: Nishant Tiwari
Updated Feb 17, 2026, 06:13 IST

Surya Grahan: 17 फरवरी, 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। अंतरिक्ष में होने वाली इस अनूठी खगोलीय घटना को लेकर दुनिया भर के खगोलविदों और आम लोगों में जबरदस्त उत्सुकता है। नासा (NASA) के अनुसार, यह एक 'वलयाकार सूर्य ग्रहण' (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' भी कहा जाता है। आइए, वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जानते हैं कि इस बार के सूर्य ग्रहण में क्या खास है, यह कहां दिखाई देगा और इसे या किसी और सूर्य ग्रहण को देखते समय किन सावधानियों का पालन करना जरूरी है।

17 फरवरी को दिखेगा 'रिंग ऑफ फायर'

इस बार का सूर्य ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह एक वलयाकार यानी एन्यूलर ग्रहण है। वलयाकार ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है। इस स्थिति में चंद्रमा आकार में सूर्य से छोटा दिखाई देता है। जिसके कारण चंद्रमा सूरज के बीच के हिस्से को तो ढक लेता है, लेकिन उसके किनारों को नहीं ढक पाता। इसकी वजह से सूरज आसमान में एक चमकता हुआ छल्ला सा दिखाई देता है, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। 17 फरवरी को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा, लेकिन कहां?

कहां और कब लगेगा सूर्य ग्रहण

भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 03:26 PM पर शुरू होगा और शाम 07:57 PM पर खत्म होगा। हालांकि, भारतीयों के लिए थोड़ी निराशाजनक खबर यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका मुख्य रास्ता अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरेगा। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन और डरबन, जिम्बाब्वे, तंजानिया, नामीबिया, मॉरीशस और दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारत में रहने वाले लोग इसे नासा के यूट्यूब चैनल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाइव देख सकते हैं। आइए अब सूर्य ग्रहणों के प्रकार के बारे में जान लेते हैं।

solar eclipse types.

solar eclipse types.

सूर्य ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?

ब्रह्मांड में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की जुगलबंदी के आधार पर ग्रहण चार प्रकार के होते हैं, बारी-बारी से समझते हैं।

पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse): यह तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढंक लेता है, जिससे दिन में अंधेरा छा जाता है। केवल इसी दौरान कुछ पल के लिए सूर्य का बाहरी वातावरण (कोरोना) देखा जा सकता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse): जैसा कि कल, 17 फरवरी को होने जा रहा है। इस सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के बीच में होता है और चारों ओर एक चमकती हुई रिंग नजर आती है।

आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse): इसमें चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है, जिससे सूर्य आधे कटे हुए सेब या हंसिया की तरह दिखाई देता है।

हाइब्रिड सूर्य ग्रहण (Hybrid Solar Eclipse): यह अत्यंत दुर्लभ है। पृथ्वी की वक्रता (Curvature) के कारण, यह ग्रहण अपने रास्ते में कहीं पूर्ण तो कहीं वलयाकार दिखाई देता है।

Pinhole Projector for solar eclipse.

Pinhole Projector for solar eclipse.

सावधानी के साथ कैसे देखें सूर्य ग्रहण

भले ही भारतीयों को 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण देखना न नसीब हो लेकिन किसी भी सूर्य ग्रहण को देखने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं। नासा की वेबसाइट पर इससे जुड़े लेख में लिखा है कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन न किया जाए तो सूर्य ग्रहण खतरनाक भी हो सकता है। तो आखिर सूर्य ग्रहण देखने का सही तरीका क्या है? आइए जानते हैं।

कभी भी नंगी आंखों से न देखें: पूर्ण सूर्य ग्रहण का वह पल जब कुछ सेकंडों के लिए चंद्रमा सूरज को पूरा ढक (Totality) चुका होता है, उसको छोड़कर, कभी भी सूर्य को सीधे नहीं देखना चाहिए। 17 फरवरी का ग्रहण वलयाकार है, इसलिए इस तरह के सूर्य ग्रहण को देखते समय सुरक्षा चश्मे की आवश्यकता होगी।

साधारण सनग्लासेस का उपयोग न करें: ध्यान देने वाली बात यह भी है कि आपके साधारण धूप के चश्मे सूर्य की हानिकारक किरणों से सुरक्षा नहीं कर सकते। इसके लिए केवल प्रमाणित 'एक्लिप्स ग्लासेस' का ही इस्तेमाल करें।

ऑप्टिकल उपकरणों के साथ सावधानी: इसके अलावा सूर्य ग्रहण को कभी भी कैमरा लेंस, दूरबीन (Binoculars) या टेलीस्कोप के माध्यम से न देखें, भले ही आपने एक्लिप्स ग्लासेस पहने हों। तेज सूरज की किरणें फिल्टर को जला सकती हैं और आपकी आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

पिनहोल प्रोजेक्टर: यदि आपके पास खास चश्मा नहीं है, तो आप कार्डबोर्ड के डिब्बे में एक छोटा छेद करके उसकी छाया सफेद कागज पर देख सकते हैं। यह ग्रहण देखने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

अक्सर लोग आंखों की चिंता तो करते हैं, लेकिन त्वचा को भूल जाते हैं। ग्रहण के दौरान आप घंटों सीधी धूप में रह सकते हैं। सूर्य की तेज किरणों से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन, टोपी और पूरे बांह के कपड़े पहनें। तो अब आपको पता चल चुका है कि सूर्य ग्रहण जैसे रोमांचक नजारे को कैसे देखना है, तो बस इंतजार करिए उस ग्रहण का जो भारत में लगे और इस अद्भुत घटना को देखिए।

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