देश के प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी जयंत नारलीकर को शनिवार को ‘विज्ञान रत्न पुरस्कार’ के लिए चुना गया। यह भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च विज्ञान सम्मान है। नारलीकर का 86 वर्ष की आयु में 20 मई 2024 को निधन हो गया था। उन्हें यह पुरस्कार मरणोपरांत उनकी असाधारण वैज्ञानिक उपलब्धियों और ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है।
दिवंगत खगोल वैज्ञानिक जयंत नारलीकर को विज्ञान रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया (फोटो ANI)
‘बिग बैंग’ सिद्धांत को दी थी चुनौती
जयंत नारलीकर ने पारंपरिक ‘बिग बैंग’ सिद्धांत को चुनौती दी थी, जिसके अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक ही क्षण में हुई थी। उन्होंने ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर ‘स्टेडी स्टेट थ्योरी’ प्रस्तुत की, जिसके अनुसार ब्रह्मांड हमेशा से अस्तित्व में रहा है और उसमें निरंतर नए पदार्थों का निर्माण होता रहता है। यह सिद्धांत 20वीं सदी में खगोल विज्ञान की सोच को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
सरकार ने इसके साथ ही 2025 के लिए आठ ‘विज्ञान श्री पुरस्कार’ विजेताओं की भी घोषणा की, जिनमें शामिल हैं:
- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान)
- यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा)
- के. थंगराज (जैविक विज्ञान)
- प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान)
- अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान)
- एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान)
- माहन एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान)
- जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
4 विज्ञान युवा पुरस्कार विजेता
इसके अलावा, सरकार ने 14 विज्ञान युवा पुरस्कार विजेताओं के नाम भी घोषित किए हैं। वहीं, सीएसआईआर (वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद) की अरोमा मिशन टीम, जिसने जम्मू और कश्मीर में लैवेंडर मिशन की शुरुआत की थी, को विज्ञान टीम पुरस्कार के लिए चुना गया है।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की 2023 में हुई थी शुरुआत
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार, जिसकी शुरुआत 2023 में की गई थी, का उद्देश्य देश में वैज्ञानिक नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को सम्मानित करना है। ‘विज्ञान रत्न’ इस पुरस्कार श्रृंखला का सबसे ऊँचा सम्मान है।
