यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने की घटना, जिसमें 9 यात्रियों की मौत हो गई थी, का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सड़क परिवहन मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (CS) से इस मामले पर जवाब मांगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने आगरा के रहने वाले किशन चंद जैन की अर्जी पर मुख्य सचिव और मंत्रालय को नोटिस जारी किया। अर्जी में मांग की गई थी कि मुख्य सचिव से 23-24 सितंबर, 2026 की रात जेवर के पास बस में लगी आग के बारे में एक तय समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए।
'यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे' पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
याचिका में कहा गया है कि रिपोर्ट में आग लगने का कारण, बस का मालिकाना हक, रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, इंश्योरेंस और अधिकृत क्षमता के साथ-साथ निर्माण और आग से सुरक्षा संबंधी नियमों के पालन की जानकारी भी शामिल होनी चाहिए।
'...किसी भी टोल प्लाजा या शुल्क प्लाजा से गुजरने की अनुमति न दी जाए'
इसमें यह निर्देश देने की मांग की गई कि पांच से अधिक बिना भुगतान वाले चालान वाली किसी भी परिवहन गाड़ी को किसी भी टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति न दी जाए। याचिका में कहा गया, 'सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और उसकी टोल-संग्रह शाखा इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड और सभी राज्य सरकारों और राज्य एक्सप्रेसवे प्राधिकरणों को निर्देश दिया जाए कि जब तक चालान की राशि का भुगतान न हो जाए, तब तक पांच से अधिक बिना भुगतान वाले चालान वाली किसी भी परिवहन गाड़ी को राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर किसी भी टोल प्लाजा या शुल्क प्लाजा से गुजरने की अनुमति न दी जाए।'
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ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई थी। यह घटना 24 सितंबर को जेवर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत 33-किमी माइलस्टोन के पास हुई थी, बस दिल्ली से बिहार जा रही थी।
जारी परमिट का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
याचिका में तर्क दिया गया कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सार्वजनिक सेवा वाली गाड़ी में सुरक्षित यात्रा करने का अधिकार भी शामिल है, जिसे राज्य ने यात्रियों को ले जाने के लिए फिट और अधिकृत प्रमाणित किया हो। घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले राज्य के अधिकारियों को ऐसी बसों के लिए सुरक्षा जांच और जारी किए गए परमिट का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
