असम में कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका के साथ 40 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। विपक्षी दलों खासतौर पर कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली हिमंत बिस्व सरमा सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। साथ ही और हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग की।
गुवाहाटी में आशुतोष रांका और सीजेपी कार्यकर्ताओं की हिरासत।
40 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का दावा
इससे पहले, सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका के साथ 40 से ज्यादा स्वयंसेवकों को दिसपुर इलाके में असम जातीय परिषद नेता कुंकी चौधरी के आवास से हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया था। यहां सीजेपी की बैठक प्रस्तावित थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया था कि पुलिस ने आशुतोष रांका और सीजेपी टीम को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गई थी।कांग्रेस ने पूछा- BJP युवाओं से क्यों डर रही?
इस घटनाक्रम के बाद असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हमला बोलते हुए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि असम के युवाओं,इन्फ्लुएंसर्स और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना स्वीकार्य नहीं है। गोगोई ने सवाल उठाया कि BJP युवाओं से इतनी क्यों डर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज रोकने की कोशिश कर रही है। हालांकि,ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों पर जवाब इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
वहीं, कांग्रेस की कानूनी इकाई के महासचिव रीतम सिंह ने आशुतोष रांका को लेकर दिसपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि रांका को पुलिस की वर्दी में आए लोगों ने हिरासत में लिया।
‘कम से कम वकील को मिलने दें’
वहीं, राइजर दल की नेता ज्ञानश्री बोरा ने दावा किया कि रांका और अन्य हिरासत में लिए गए लोगों से किसी को मिलने या संपर्क करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कम से कम उनके वकील को उनसे मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि CJP सदस्यों को एक निजी परिसर में चर्चा के दौरान हिरासत में लिया गया। बोरा ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें रिहा नहीं किया गया तो राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संगठन उनके समर्थन में सामने आ सकते हैं।
AJP ने भी पुलिस कार्रवाई का विरोध किया
वहीं, असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को टैग करते हुए कहा कि असहमति अपराध नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार को डर नहीं है तो सवाल उठाने वालों को चुप क्यों कराया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के पूर्वोत्तर राज्यों के प्रभारी राजेश शर्मा ने भी कथित हिरासत को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के कार्यकर्ताओं को राज्य के मुद्दों पर चर्चा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
बीजेपी ने भी दिया जवाब
वहीं भाजपा नेता मानव डेका ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के उस सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के सदस्यों के साथ असम आएंगे। डेका ने कहा कि असम धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने असम के इतिहास और मुगलों का जिक्र करते हुए दीपके को राज्य के इतिहास और लोगों को समझने की सलाह दी।
