Devendra Nath Mahto Jharkhand Sonam Wangchuk: झारखंड में 14वीं जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इस राष्ट्रव्यापी चर्चा का केंद्र बने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जिन्हें समर्थक 'झारखंड का सोनम वांगचुक' कह रहे हैं, रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्वयं महतो से वीडियो कॉल पर बात कर उनका हालचाल जाना और उनसे पानी पीने की भावुक अपील की।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? छात्र नेता जिन्हें झारखंड का 'सोनम वांगचुक' कहा जा रहा
वांगचुक के आग्रह पर महतो ने पिया पानी
जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन का अनुभव रख चुके सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से सीधे संवाद किया। बातचीत और घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:
स्वास्थ्य का लिया जायजा: सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की लगातार बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और उनके आंदोलन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
पानी पीने का आग्रह: वांगचुक की विशेष अपील पर महतो ने पानी ग्रहण किया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका अन्न त्याग और अनिश्चितकालीन अनशन पूरी कड़ाई से जारी रहेगा।
CJP व बॉलीवुड का समर्थन: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी वीडियो कॉल के जरिए महतो से बात कर छात्रों के साथ एकजुटता जताई। इसके अलावा बॉलीवुड कलाकार सोनाक्षी सिन्हा और इमरान खान ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाकर छात्रों के समर्थन में आवाज बुलंद की है।
झारखंड में जारी छात्रों का भारी आंदोलन
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो और क्यों हो रही है 'सोनम वांगचुक' से तुलना?
रांची जिले के एक ग्रामीण इलाके से आने वाले देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बुंडू से की और बाद में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से बी.एड (B.Ed.) तथा हजारीबाग से संस्कृत व कुरमाली (क्षेत्रीय भाषा) में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। महतो पिछले एक दशक से स्कॉलरशिप, पारदर्शी भर्ती नियमावली, पेपर लीक और आरक्षण नीति जैसे मुद्दों पर छात्रों की आवाज उठाते आ रहे हैं। उन्होंने 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमाड़ सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी चुनाव लड़ा था। सोनम वांगचुक की तरह ही अन्याय के खिलाफ अहिंसक सत्याग्रह और मूक अनशन का मार्ग चुनने के कारण प्रदेश के लाखों युवा उन्हें 'झारखंड का सोनम वांगचुक' कहकर संबोधित कर रहे हैं।
क्या हैं आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें?
5 जुलाई को 14वीं JPSC परीक्षा के परिणाम आने के बाद से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।
-छात्र संगठन 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल और अन्य सभी संदिग्ध भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की केंद्रीय एजेंसियों (CBI व ED) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
-जब तक भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
बता दें कि महतो ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों से अपील की है कि शारीरिक कमजोरी के बावजूद उनका संकल्प मजबूत है, और यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की है, जिसे पूरी तरह संवैधानिक और शांतिपूर्ण ढंग से लड़ा जाएगा।
