प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भरता को भारत की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि भारत का कोई बाहरी दुश्मन नहीं है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा विदेशी निर्भरता है। इसी कड़ी में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया – “चिप हो या शिप... हमें भारत में ही बनाने होंगे।”
गुजरात में पीएम मोदी (फोटो- Gujarat BJP)
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आत्मनिर्भरता: समस्याओं का एकमात्र समाधान
मोदी ने कहा कि भारत की सभी चुनौतियों का समाधान आत्मनिर्भरता में है। उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी निर्भरता न केवल आर्थिक विफलताओं को जन्म देती है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए भी खतरा है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा – “140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों पर नहीं छोड़ा जा सकता। आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दूसरों पर आधारित नहीं होना चाहिए।”
कांग्रेस की नीतियों पर तीखा प्रहार
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद की कांग्रेस सरकारों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लाइसेंस राज’ और आयात-केन्द्रित नीतियों ने भारत की प्रतिभा और संभावनाओं को दबा दिया। मोदी ने कहा कि जब दुनिया वैश्वीकरण की ओर बढ़ रही थी, तब भारत घोटालों और आयात पर निर्भरता में फंसा रहा। परिणामस्वरूप, देश को वह सफलता देर से मिली जिसकी वह दशकों पहले हकदार था।
नौवहन क्षेत्र की उपेक्षा
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से नौवहन उद्योग की अनदेखी को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पचास साल पहले तक भारत का 40 प्रतिशत व्यापार घरेलू जहाजों से होता था, जो अब घटकर मात्र 5 प्रतिशत रह गया है। आज भारत हर साल विदेशी नौवहन कंपनियों को लगभग 75 अरब डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) का भुगतान करता है। मोदी ने कहा – “अगर पिछली सरकारों ने इन संसाधनों का एक हिस्सा भी देश के जहाज निर्माण उद्योग में लगाया होता, तो आज भारत जहाज निर्माण और नौवहन सेवाओं में अग्रणी होता।”
‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज, एक बंदरगाह’ की ओर कदम
मोदी ने ऐलान किया कि समुद्री व्यापार से जुड़ी पुरानी, जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त किया जा रहा है। अब देशभर के बंदरगाहों पर ‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज’ और ‘एक राष्ट्र, एक बंदरगाह’ की व्यवस्था लागू होगी, जिससे व्यापार और वाणिज्य सरल और पारदर्शी होगा। उन्होंने हाल ही में पारित नए समुद्री कानूनों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ये सुधार नौवहन और बंदरगाह प्रशासन को आधुनिक स्वरूप देंगे।
जहाज निर्माण उद्योग को ‘बुनियादी ढांचा’ दर्जा
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि बड़े जहाजों को अब ‘बुनियादी ढांचा’ का दर्जा मिल गया है। इस फैसले से जहाज निर्माण कंपनियों को बैंक ऋण सुलभ और सस्ता होगा। मोदी के अनुसार, “बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण से जुड़े सभी लाभ अब जहाज निर्माण उद्योग को भी मिलेंगे, जिससे यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगा।”
विकास परियोजनाओं का शुभारंभ
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री क्षेत्र से संबंधित 7,870 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसके अलावा, गुजरात के विभिन्न हिस्सों में 26,354 करोड़ रुपये से अधिक लागत की केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का अनावरण किया गया। इनमें ऊर्जा, अवसंरचना, स्वास्थ्य और शहरी परिवहन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
