Mukhtar Ansari Gangster Case: मुख्तार अंसारी के सिर पर कोई एक दो या तीन केस नहीं हैं। अगर आप उनसे खुद पूछें तो जवाब यही होगा कि अब तो याद नहीं। लेकिन 15 साल पुराने एक केस को वो शायह ही भूल पाएं। साल 2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी(mp afzal ansari) के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इस केस में 2005 कृष्णानंद राय मर्डर केस(krishna nand rai murder case) और नंद किशोर रुंगटा अपहरण(nand kishor rungta kidnapping case) मामले को आधार बनाया गया था। गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाने वाली है।
मुख्तार के सांसद भाई अफजाल भी आरोपी
मुख्तार अंसारी के खिलाफ दो मामलों में और अफजाल अंसारी के खिलाफ एक मामले( सिर्फ कृष्णानंद राय केस) में मुकदमा दर्ज हुआ। यहां बता दें कि दोनों भाई कृष्णानंद राय मर्डर केस में 2019 में बरी हो चुके हैं। मुख्तार अंसारी, नंद किशोर रुंगटा केस में भी बरी है। लेकिन गैंगस्टर केस में सजा सुनाई जानी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों भाई कृष्णानंद राय मर्डर केस में रसूख का इस्तेमाल कर गवाहों पर दवाब बना कर गवाही नहीं होने दी और उसका फायदा उन्हें अदालती फैसले में मिला।
गैंगस्टर एक्ट में कितनी है सजा
गैंगस्टर एक्ट में दो से 10 साल की सजा का प्रावधान है। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर अफजाल अंसारी दोषी करार दिए जाते हैं तो उनकी लोकसभा की सदस्यता चली जाएगी। गैंगस्टर एक्ट में न्यूनतम दो साल सजा देने की व्यवस्था है। अगर दो साल की सजा भी अफजाल को मिलती है को उनका सांसदी से अयोग्य होना तय है। अफजाल अंसारी शारीरिक तौर पर अदालत के सामने पेश होंगे जबकि बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मौजूग होंगे।
