Electoral Bond Case: चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से संबंधित आंकड़े सौंपने के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने चुनाव आयोग को क्या-क्या जानकारी सौंपी है। एसबीआई द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, एक अप्रैल 2019 से इस साल 15 फरवरी के बीच कुल 22,217 चुनावी बॉण्ड खरीदे गए और राजनीतिक दलों ने 22,030 बॉण्ड भुनाए।
एसबीआई ने हलफनामे में यह भी बताया कि न्यायालय के निर्देश के अनुसार, उसने 12 मार्च को कामकाजी समय खत्म होने से पहले भारत निर्वाचन आयोग को चुनावी बॉण्ड का विवरण उपलब्ध करा दिया। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक चुनावी बॉण्ड की खरीद की तारीख, खरीदार के नाम और खरीदे गए बॉण्ड का मूल्य आदि विवरण प्रस्तुत किए गए हैं।
11 दिन में बिके 3346 बॉन्ड
एसबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल 2019 से लेकर उसी साल 11 अप्रैल तक कुल 3346 बॉन्ड खरीदे गए। इनमें से कुल 1609 बॉन्ड कैश कराए गए। एसबीआई के अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि बैंक ने निर्वाचन आयोग को चुनावी बॉण्ड को भुनाने की तारीख, चंदा प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों के नाम और बॉण्ड के मूल्य जैसे विवरण भी दिए हैं।
15 मार्च को सामने आएगी जानकारी
चुनावी बॉन्ड में किस राजनीतिक दल को कितना चंदा दिया गया और इससे संबंधित अन्य जानकारियां 15 मार्च को सामने आएंगी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को 15 मार्च शाम पांच बजे तक बैंक द्वारा साझा की गई जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी। बता दें, उच्चतम न्यायालय ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों, चंदे के रूप में दी गई राशि और प्राप्तकर्ताओं का 13 मार्च तक खुलासा करने का आदेश दिया था। योजना को बंद करने का आदेश देते हुए, शीर्ष अदालत ने योजना के तहत अधिकृत वित्तीय संस्थान एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से अब तक खरीदे गए चुनावी बॉन्ड का विवरण छह मार्च तक निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था।
