TMC Rebel MPs Delhi Meet: पश्चिम बंगाल की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19 सांसदों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) आगामी रविवार (14 जून) को देश की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। वहां वह लोकसभा स्पीकर से मुलाकात से ठीक पहले टीएमसी के इन बागी सांसदों के साथ एक हाई-लेवल बैठक करेंगे।
दिल्ली में बागी टीएमसी सांसदों संग बैठक करेंगे सीएम शुभेंदु अधिकारी
यह पूरी हलचल हाल ही में संपन्न हुए 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी के खराब प्रदर्शन के बाद शुरू हुई है, जिसने पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और ममता बनर्जी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच की दरार को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
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क्या है बागियों का प्लान?
बागी गुट के सांसद जगदीश बर्मा बसुनिया ने आगामी दिनों की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि सभी बागी सांसद शनिवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। रविवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक होगी, जिसके बाद सोमवार (15 जून) को ये सभी सांसद लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करेंगे। बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से संसद में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था (सीटिंग अरेंजमेंट) की मांग की है।
इस गुट में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, युसूफ पठान और रचना बनर्जी जैसे 19 बड़े नाम शामिल हैं। बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया कि उनके पास कुल 20 सांसदों का समर्थन है और वे केंद्र व राज्य के बीच 'जॉइंट-इंजन सरकार' बनाकर टीएमसी को नए रूप में खड़ा करना चाहते हैं। कयास यह भी हैं कि कल तक ममता बनर्जी के करीबी रहे कल्याण बनर्जी भी इस गुट में शामिल हो सकते हैं।
इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर लड़ें चुनाव-महुआ मोइत्रा
दूसरी तरफ, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि इन 'गद्दार' सांसदों को कानून की समझ नहीं है। 2003 के 91वें संविधान संशोधन के बाद संसद में अलग गुट या पार्टी विभाजन मान्यता का प्रावधान खत्म हो चुका है।
महुआ ने साफ किया कि अगर-अलग गुट बनाना है, तो मूल पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसदों का किसी दूसरी पार्टी में विलय होना जरूरी है, सिर्फ 19 सांसदों की संख्या से कुछ नहीं होगा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इन सभी बागियों को संसद से इस्तीफा देना चाहिए और बीजेपी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। इस बगावत से अब टीएमसी के टूटने और बागी धड़े के एनडीए (NDA) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
