तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि उनका गुट ही ’असली तृणमूल’ है। उन्होंने इसी के साथ तृणमूल के कांग्रेस में विलय की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। ऋतब्रत बनर्जी का यह बयान पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात और उनके नीत गुट के भविष्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच आया है।
तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में बागी गुट के विधायकों की संख्या 58 से बढ़कर 64 हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके नीत गुट को पार्टी के ज्यादातर विधायकों और बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन हासिल है और वे तृणमूल कांग्रेस के बैनर तले ही काम करते रहेंगे। ऋतब्रत ने राज्य विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से कहा कि हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। हम कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं।
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ममता बनर्जी की कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात और राष्ट्रीय राजधानी में अभिषेक बनर्जी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत की खबरों के बाद लगाई जा रही अटकलों के बीच उनकी ये टिप्पणियां आई है। इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में ममता नीत धड़े के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े अंदरूनी संकट से जूझ रही है। ऋतब्रत ने हालांकि उन सुझावों को खारिज कर दिया कि संगठन कांग्रेस के नेतृत्व वाली किसी व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है।
जल्द ही लिखेंगे विधानसभा अध्यक्ष को नया पत्र
बागी नेता ने बताया कि विधानसभा में बदले हुए शक्ति संतुलन को दर्शाने के लिए जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को नया पत्र सौंपा जाएगा। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि पार्टी के भीतर वास्तविक समर्थन किसके पास है।
बागी सांसदों को लेकर भी कही बड़ी बात
ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी दोहराया कि लोकसभा में बागी सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन जारी रखेंगे। गौरतलब है कि हाल ही में तृणमूल के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग संसदीय गुट बनाने की जानकारी दी थी और एनडीए को समर्थन देने की बात कही थी।
विलय का सवाल ही कहां उठता है?
ऋतब्रत ने सवाल किया कि ज़्यादातर विधायक कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। ज्यादातर सांसद भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। कई जिला नेता और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं। तो फिर विलय का सवाल ही कहां उठता है? उन्होंने दोहराया कि लोकसभा में बागी सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का समर्थन जारी रखेंगे।
इस हफ्ते की शुरुआत में तृणमूल का संकट तब और गहरा गया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के भीतर शुरू हुई बगावत संसद तक पहुंच गई। इस माहौल में,दिल्ली में ममता बनर्जी,अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। ऐसी अटकलें भी तेज हैं कि ममता बनर्जी नीत तृणमूल का धड़ा कांग्रेस के साथ नज़दीकी रिश्ते बनाने या पार्टी के विलय पर विचार कर सकता है।
हालांकि किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से विलय के बारे में बात नहीं की है,लेकिन इन बैठकों ने इतनी राजनीतिक चर्चा पैदा कर दी है कि बागी खेमे को बार-बार अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है। से जब यह पूछा गया कि अगर ममता बनर्जी अपने धड़े का कांग्रेस में मिलाने का फैसला करती हैं तो क्या होगा, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। इस पर उन्होंने कहा कि कल के सवालों का जवाब कल ही मिलेगा। आज की बात करें तो यह संख्या 64 है और बढ़ रही है।
पार्टी के 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े अंदरूनी संकट के बीच तृणमूल कांग्रेस में जारी यह सियासी खींचतान अब विधानसभा से लेकर संसद तक पहुंच चुकी है। ऐसे में ममता बनर्जी खेमे और बागी गुट के बीच शक्ति प्रदर्शन की राजनीति आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
