महिला होकर पुरुषों के अधिकारों की आवाज क्यों बनीं बरखा त्रेहन? उठा रहीं ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ की मांग

पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बरखा त्रेहन ने पुरुषों के उत्पीड़न पर बात करते हुए कहा कि इनकी कहीं सुनवाई नहीं होती है। जब किसी पुरुष के साथ घरेलू या सामाजिक स्तर पर बुरा बर्ताव होता है, तो उसकी बात सुनने के बजाय उसे ही दोषी मान लिया जाता है।

आज के आधुनिक समाज में जहां लैंगिक समानता पर खुलकर बहस हो रही है, वहीं पुरुषों से जुड़े मानसिक, भावनात्मक और कानूनी मुद्दों पर बातचीत अक्सर पीछे छूट जाती है। टाइम्स नाउ नवभारत के चर्चित पॉडकास्ट 'EYE Opener'में पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बरखा त्रेहन ने इस अनसुनी पीड़ा को समाज के सामने रखा है। 'पुरुष आयोग' नामक एनजीओ चलाने वाली बरखा तरेहान ने पुरुषों के प्रति होने वाली हिंसा के खिलाफ आवाज उठाते हुए देश में पुरुषों के लिए भी एक समर्पित संवैधानिक मंच की मांग की है।

eye opener.

'पुरुष आयोग' की प्रेसिडेंट बरखा त्रेहन एक्सक्लूसिव

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