उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में कहा कि वो स्वास्थ्य कारणों के कारण भारत के उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे रहे हैं। धनखड़ राज्यसभा के सभापति भी हैं और उन्होंने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही इस्तीफा दे दिया। हाल में उनकी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी हुई थी। अगस्त 2022 में जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और अभी उनकी उम्र 74 साल है।
जगदीप धनखड़ ने क्यों दिया इस्तीफा
जगदीप धनखड़ ने कहा- "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत की माननीय राष्ट्रपति महोदय के प्रति उनके अटूट सहयोग तथा मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद एवं अद्भुत कार्य संबंध के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा पत्र
अपने इस्तीफा पत्र में धनखड़ ने क्या-क्या लिखा
अपने इस्तीफा के पत्र में धनखड़ ने लिखा- "मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और उनकी सम्मानित मंत्रिपरिषद के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री जी का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है, और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है। सभी माननीय संसद सदस्यों से मुझे जो गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह मिला है, वह सदैव मेरी स्मृति में बना रहेगा। मैं हमारे महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में प्राप्त अमूल्य अनुभवों और अंतर्दृष्टि के लिए हृदय से आभारी हूं। इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान भारत की उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति और अभूतपूर्व विकास को देखना और उसमें भाग लेना मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात रही है। हमारे राष्ट्र के इतिहास के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करना मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है।
विपक्ष से कई बार हुआ टकराव
राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कार्यकाल में, धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था। उन्हें हटाने का प्रस्ताव, बाद में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। यह प्रस्ताव स्वतंत्र भारत में किसी वर्तमान उपराष्ट्रपति को हटाने का पहला मामला था। वी वी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद, कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले वह भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।
