विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की रायपुर बैठक में विश्व हिंदू परिषद ने विधि आयोग द्वारा 'समान नागरिक संहिता' (यूसीसी) पर संदर्भ लेने का स्वागत किया है। वीएचपी के केंद्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह संतोष की बात है कि आयोग ने इस विषय पर सभी हितधारकों से विचार आमंत्रित किए हैं। भारतीय समाज के सभी वर्गों के सुझाव प्राप्त कर एवं उन पर विचार कर शीघ्र ही यूसीसी को अधिनियमित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 44 सभी सरकारों को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
वीएचपी कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार
वीएचपी नेता ने यह भी कहा कि सरला मुद्गल के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जल्द से जल्द यूसीसी को अधिनियमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कई उच्च न्यायालयों ने बार-बार इसकी आवश्यकता पर जोर दिया है। न्यायालय ने याद दिलाया कि अनुच्छेद 51ए के तहत, "धार्मिक विविधताओं से परे भारत के सभी लोगों के बीच सद्भाव और समान भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना" सभी नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है।
भारत में, सभी नागरिक आपराधिक कानून, संपत्ति, अनुबंध और वाणिज्यिक कानूनों सहित सामान्य कानूनों द्वारा शासित होते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा कोई कारण नहीं है कि पारिवारिक कानून ही एकमात्र अपवाद क्यों बने रहें।
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक धार्मिक समुदाय के व्यक्तिगत कानून महिलाओं की गरिमा, समानता और अन्य अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करते हैं। बहुविवाह, तलाक और उत्तराधिकार के बारे में उनके प्रावधान आधुनिक समय से लगभग 1400 वर्ष पीछे हैं। इस तरह की प्रथाएं संविधान द्वारा प्रदत्त महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं। इसी तरह, यूसीसी के तहत बच्चों के अधिकारों को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विधि आयोग समाज के विभिन्न वर्गों से अच्छी प्रथाओं को शामिल करके संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप यूसीसी का मसौदा शीघ्र तैयार करेगा।
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