राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी ने एक अहम फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में यह तय किया गया है कि पार्टी के सभी आंतरिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो अंतरा ही गाए जाएंगे। इसके साथ ही पार्टी ने साल 1937 में अपनाए गए अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव और रुख पर दोबारा मुहर लगा दी है।
'वंदे मातरम' पर कांग्रेस का बड़ा रुख (फाइल फोटो)
दरअसल, यह विवाद 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह से शुरू हुआ था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ, जिसमें राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी आपस में बातचीत करते दिखे।
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भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रीय गीत को बीच में ही रुकवाने की कोशिश की और इसे राष्ट्रगीत का अनादर बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल खरगे जी के बैठने के लिए कुर्सी मंगवा रही थीं, गीत रोकने की कोई मंशा नहीं थी।
खरगे का तीखा पलटवार
विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्होंने वही 'वंदे मातरम' गाया जो महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल गाया करते थे। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर यह कोई अपराध है, तो फिर देश के इन महान निर्माताओं के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
सख्त कानून के बीच सियासी मोड़
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संसद में पास हुए नए कानून 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026' के तहत 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह कानूनी संरक्षण मिला हुआ है। इसके तहत गीत में जानबूझकर बाधा डालना एक अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद कांग्रेस ने 1937 के अपने सिद्धांत पर अडिग रहने का स्पष्ट संदेश दिया है।
