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'राम का नाम बदनाम ना करो...': गाना गाकर शशि थरूर ने बोला सरकार पर हमला; जी राम जी विधेयक पर लोकसभा में हंगामा

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में 'विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किए जाने का जमकर विरोध किया। सत्तापक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक लाभ के लिए भगवान राम का नाम बदनाम कर रहे हैं।

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शशि थरूर

केंद्र की मोदी सरकार मनरेगा की जगह एक नया विधेयक लेकर आई है। इसका नाम विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 रखा गया है। वहीं, विपक्ष इसके विरोध में उतर आया है। लोकसभा में आज इसे लेकर खूब हंगामा हुआ। इस दौरान केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से सांसद शशि थरूर ने भी इसे वापस लेने की वकालत की। शशि थरूर ने शायराना अंदाज में सरकार और इस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 'देखो ओ दीवानो तुम ये काम न करो, राम का नाम बदनाम ना करो।' बता दें कि ये लाइनें देव आनंद की मशहूर फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’की हैं।

महात्मा गांधी का राम राज्य राजनीतिक प्रोजेक्ट नहीं

शशि थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी का राम राज्य का दृष्टिकोण कभी भी पूरी तरह से राजनीतिक प्रोजेक्ट नहीं था। यह एक सामाजिक-आर्थिक ब्लूप्रिंट था जो गांवों को मजबूत बनाने पर आधारित था और ग्राम स्वराज में उनका अटूट विश्वास उस दृष्टिकोण का मुख्य हिस्सा था। थरूर ने दावा किया कि मूल अधिनियम में राष्ट्रपिता का नाम रखकर इस गहरे जुड़ाव को स्वीकारा गया था कि सच्ची रोजगार गारंटी और तरक्की जमीनी स्तर से ही होनी चाहिए। यह समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति को सबसे पहले रखने के उनके सिद्धांत को दिखाता है। अब मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना विधेयक के नैतिक आधार और ऐतिहासिक वैधता को छीनना है।

विपक्ष कर रहा संसदीय समिति के पास भेजने की मांग

लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’

प्रियंका ने भी खोला मोर्चा

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए। प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।

बिल को लेकर सरकार का क्या तर्क है?

इस विधेयक को लेकर सरकार का कहना है कि यह विधेयक विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप लाया गया है। इसके जरिए एक नया और व्यापक ग्रामीण विकास ढांचा तैयार करने का उद्देश्य है। बिल के प्रावधानों के अनुसार, हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ऐसे ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी विशेष कौशल वाले शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से तैयार हों, 125 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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