BJP TMC Politics: तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तब और तेज हो गई जब बागी TMC सांसदों ने कम जानी-मानी NCPI पार्टी के साथ विलय की घोषणा की और NDA को समर्थन देने का वादा किया। ममता बनर्जी के खेमे ने इस कदम को हास्यास्पद, बेतुका बताया, जबकि बीजेपी ने इसे TMC के गहराते जा रहे संकट का सबूत करार दिया।
TMC ने बागी नेताओं के NCPI में विलय को बताया 'हास्यास्पद', BJP बोली- यह पार्टी में विचारधारा की कमी (ANI)
वरिष्ठ TMC सांसद सौगत रॉय ने बागियों के 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI), (जो त्रिपुरा की एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है) में विलय करने के फैसले का मजाक उड़ाया। उन्होंने पार्टी की राजनीतिक अहमियत और मतदाताओं के सामने इस कदम को सही ठहराने की बागियों की क्षमता, दोनों पर सवाल उठाए।
रॉय ने रविवार को PTI से कहा, 'जिस पार्टी के चुनाव चिह्न पर आप चुने गए, उससे धोखा करने के बाद आप अपने मतदाताओं का सामना कैसे करेंगे? यह विलय बेतुका है। NCPI को कौन जानता है? क्या वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर लोगों को बता सकते हैं कि वे अब NCPI का हिस्सा हैं? यह विलय गद्दारों की अपने बीजेपी आकाओं को खुश करने की हताशा को दर्शाता है।'
क्यों सीधा भाजपा में जाना नहीं चुना?
यह आरोप लगाया गया कि इस कदम के पीछे बीजेपी का खेल है। रॉय ने कहा कि बागी सांसदों ने NCPI का रास्ता इसलिए चुना क्योंकि संसदीय नियम मौजूदा पार्टी के भीतर एक अलग गुट को मान्यता देने की इजाजत नहीं देते हैं।
उन्होंने कहा, 'इसीलिए उन्होंने बीजेपी के सीधे समर्थन से यह रास्ता अपनाया। यह बेतुका है। जनता का समर्थन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के साथ रहेगा, न कि गद्दारों के साथ।'
ये टिप्पणियां तब आईं जब बागी TMC सांसदों ने NCPI के साथ विलय की घोषणा के बाद स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की।
बागी खेमे ने दावा किया कि 20 सांसदों, जो पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों की संख्या का दो-तिहाई से अधिक है, इसने इस कदम का समर्थन किया है और वे संसद में NDA का साथ देंगे।
ममता बनर्जी की टीम ने उठाई आवाज
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने स्पीकर के सामने बागियों के दावे को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी राजनीतिक दल के भीतर एक अलग गुट को मान्यता देने की इजाज़त नहीं देते हैं।
हालांकि, बीजेपी ने TMC नेतृत्व पर फिर से ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की और कहा कि बड़े पैमाने पर दलबदल सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर बढ़ती निराशा को दर्शाता है।
BJP ने क्या कहा?
बीजेपी के राज्य प्रवक्ता सायंतन बसु ने कहा कि यह घटनाक्रम TMC का आंतरिक मामला है और पार्टी नेतृत्व को दूसरों पर दोष मढ़ने के बजाय आत्म-मंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर वे NCPI में शामिल होते हैं और NDA तथा सरकार के बिलों का समर्थन करते हैं, तो यह देश के लिए अच्छा है। असल बात यह है कि कोई भी TMC में नहीं रहना चाहता। इसकी लीडरशिप को दूसरों पर दोष मढ़ने के बजाय गंभीरता से आत्म-मंथन करना चाहिए।'
