Times Now Summit: अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर में ईंधन संकट खड़ा हो चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही ठप्प है। हालांकि, ईरान ने भारत सहित मित्र देशों के कॉर्मशियल जहाजों की आवाजाही की इजाजत दी है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वैश्विक अशांति के बीच भारत पूरी तरह सुरक्षित।
इसी बीच शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करने का फैसला किया। अब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर की जगह घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है। देश में सरकार के इस कदम से पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने की उम्मीद है।
इसी बीच टाइम्स नाउ एवं टाइम्स नाउ नवभारत की ग्रुप इडिटर नाविका कुमार के साथ बातचीत में गृह मंत्री अमित शाह ने युद्ध की वजह से जारी वैश्विक संकट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की वजह से कई देश बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी: अमित शाह
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। यूरोप में 20-30%, अमेरिका में 17-34% और वियतनाम में 50% तक, जबकि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने दी गई और आपूर्ति लगातार जारी है।
अमित शाह ने कहा कि सरकार ने दावा किया कि इस संकट का बोझ खुद उठाते हुए एक्साइज ड्यूटी घटाई गई, ताकि आम जनता पर असर न पड़े। अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार ऐसा इसलिए कर पाई क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था सही चल रही है।
देश में ईंधन की कोई समस्या नहीं: अमित शाह
वहीं, उन्होंने कहा कि कई देशों में ईंधन की भारी किल्लत है, श्रीलंका में पेट्रोल सीमित मात्रा में मिल रहा है, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी राशनिंग जैसी स्थिति है, जबकि भारत में सामान्य गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी हैं। भाषण में यह भी बताया गया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पहले भारत 27 देशों से पेट्रोलियम आयात करता था, जो अब बढ़कर 42 देशों तक पहुंच गया है। इसके अलावा, एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी, रेलवे का बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण, और रणनीतिक भंडार (reserves) को मजबूत करने जैसे फैसलों ने संकट से निपटने में मदद की है।
जब अमित शाह से पूछा गया कि आखिर पश्चिम एशिया में फैली अशांति को लेकर जब सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई तो राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता क्यों नहीं आए। वहीं, टीएमसी के नेता भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इस सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि ज्यादातर विपक्षी नेता वहां शामिल थे। हमें बताया गया कि सोनिया गांधी की खराब तबीयत की वजह से राहुल गांधी बैठक में शामिल नहीं हो सके।
संसद में चर्चा को लेकर क्या बोले अमित शाह?
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में जो बैठक हुई, उसमें सभी नेताओं ने एक साथ कहा कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार के साथ है। जब उनसे पूछा गया, तो विपक्षी नेताओं का आरोप है कि युद्ध और सरकार की कार्रवाई को लेकर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
इस पर अमित शाह ने कहा कि ऐसी पहली बार नहीं हुआ है कि कोई वैश्विक संकट आया है। दरअसल, जब ऐसी परिस्थितियां आती हैं तो इन मामलों में डिप्लोमेसी शामिल होती है। ऐसे संकट में अर्थव्यवस्था के बड़े-बड़े फैसले जुड़े होते हैं। डिमांड-सप्लाई के मुद्दे जुड़े होते हैं। ऐसी चर्चाएं सार्वजनिक नहीं होती हैं; ऐसी बातें सार्वजनिक होने से 'पैनिक' होता है। संकट को निपटाने के लिए ऐसी बातों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
