Mount Everest: सागरमाथा के इतने रहस्य, 70 साल में बहुत कुछ बदल गया

  • Authored by: ललित राय
  • Updated May 28, 2023, 08:35 AM IST

Mount Everest: माउंट एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा के नाम से भी जाना जाता है। धरती की सतह पर इतना ऊंचा कोई और भोगौलिक आकृति नहीं है। सागरमाथा पर पिछले 70 साल से अनवरत चढ़ाई जारी है। इन सत्तर सालों में क्या कुछ बदला उसे हम बताएंगे।

Mount Everest: सत्तर साल पहले, न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाली तेनजिंग नोर्गे शेरपा 29 मई, 1953 को एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले इंसान बने।ब्रिटिश अभियान ने दो पुरुषों को दुनिया भर में घरेलू नाम बना दिया और पर्वतारोहण को हमेशा के लिए बदल दिया।हर साल सैकड़ों लोग 8,849 मीटर (29,032 फुट) की चोटी पर चढ़ते हैं, जिससे पहाड़ पर भीड़भाड़ और प्रदूषण की चिंता बढ़ जाती है। यहां हम बताएंगे कि जब सत्तर साल पहले एवरेस्ट पर चढ़ाई का सिलसिला शुरू हुआ तबसे लेकर आज तक क्या कुछ बदला।

पर्वत किसे कहते हैं?

शुरुआत में केवल ब्रिटिश मानचित्र निर्माताओं को पीक XV के रूप में जाना जाता था, पहाड़ को 1850 के दशक में दुनिया के सबसे ऊंचे बिंदु के रूप में पहचाना गया था और 1865 में भारत के पूर्व सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर इसका नाम बदल दिया गया था।नेपाल और चीन की सीमा पर और दोनों ओर से चढ़ने योग्य, इसे शेरपा और तिब्बती में चोमोलुंगमा या क्यूमोलंगमा कहा जाता है, दुनिया की देवी मां और नेपाली में सागरमाथा जिसका अर्थ है आकाश की चोटी।

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