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स्वाति मालीवाल की शिकायत के बाद पुलिस का एक्शन शुरू, केजरीवाल के PA बिभव की तलाश के लिए 10 टीमें गठित

Swati Maliwal Assault Case News and Update: स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के आरोपी बिभव कुमार की तलाश के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 टीमें गठित की हैं। इनमें से 4 टीमें बिभव कुमार की लोकेशन तलाश कर रही हैं। पुलिस को शक है कि बिभव कुमार महाराष्ट्र भाग गया होगा।

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स्वाति मालीवाल मामले में पुलिस की जांच शुरू

Photo : Twitter

Swati Maliwal Case News and Update: दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष व आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार को स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के पीए विभव कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। सूत्रों का कहना है कि इसके तुरंत बाद पुलिस की एक टीम देर रात बिभव कुमार के घर पहुंची, हालांकि वह घर पर नहीं मिले। घर पर उनकी पत्नी मौजूद थीं।

अधिकारियों का कहना है कि स्वाति मालीवाल के मामले में टाइमलाइन सीक्वेंस बनाकर जांच की जा रही है। इसके हिसाब से ही दिल्ली पुलिस सीसीटीवी फुटेज को भी खंगालेगी और मामले की तह तक जाने का प्रयास करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने करीब 10 टीमें बनाई हैं, जो मामले की जांच कर रही हैं। इनमें से 4 टीमों को बिभव की लोकेशन का पता लगाने का जिम्मा दिया गया है।

स्वाति मालीवाल का कराया गया मेडिकल

स्वाति मालीवाल की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने उनका मेडिकल कराया। इसके लिए पुलिस उन्हें एम्स ले गई, जहां करीब 4 घंटे तक मालीवाल रहीं। रात करीब 3 बजकर 15 मिनट पर स्वाति मालीवाल को एम्स से उनके घर वापस भेजा गया। उधर, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और बिभव कुमार को आज 11 बजे तक पेश होने का निर्देश दिया है।

बुरी तरह हुई स्वाति मालीवाल के साथ पिटाई

स्वाति मालीवाल ने पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा है कि जब वह मुख्यमंत्री आवास के ड्राइंग रूम में इंतजार कर रही थीं, तो उनके निजी सचिव बिभव कुमार आए और बिना किसी उकसावे के उन्हें थप्पड़ मारा और उनके पेट पर मुक्के भी मारे। उन्होंने कहा, बिभव आया और मुझे गाली देना शुरू कर दिया। बिना किसी उकसावे के उसने मुझे बार-बार थप्पड़ मारे। मैं चिल्लाती रही, उससे रुकने और मुझे जाने देने की विनती करती रही, लेकिन वह मेरे साथ मारपीट करता रहा। उसने 'देख लेंगे, निपटा देंगे' जैसी बातें कहते हुए धमकियां दीं। उसने मेरी छाती, चेहरे, पेट और मेरे शरीर के निचले हिस्से पर वार किया। मैंने उसे बताया कि मैं मासिक धर्म से गुजर रही हूं और काफी दर्द में हूं, मैंने उससे वहां से चले जाने की गुहार लगाई। आखिरकार, मैं भागने में सफल रही और कमरे से बाहर जाकर मदद के लिए पुलिस को बुलाया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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