Who are sleeping partners: अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ(Atique ahmed ashraf ahmed news) अब इस दुनिया में नहीं हैं। 15 अप्रैल को मोतीलाल नेहरू मंडलीय अस्पताल के बाहर जब वो मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे उसी वक्त क्लोज रेंज में तीन बदमाशों लवलेश तिवारी, अरुण मौर्या और सन्नी सिंह ने गोली मार दी। तीनों आरोपी पुलिस के कब्जे में हैं। लेकिन यह गुत्थी अभी उलझी हुई है कि आखिर अतीक और अशरफ को मारने के पीछे वजह क्या है। आखिर वो कौन सा शख्स है जो इस हत्याकांड के पीछे। पुलिस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में लगी हुई है। इस मर्डर केस में अतीक और अशरफ के खासमखास रहे शूटर गुड्डू मुस्लिम का नाम सामने आ रहा है तो दूसरी तरफ स्लीपिंग पार्टनर्स का भी नाम सामने आ रहा है। यहां पर हम बताएंगे कि स्लीपिंग पार्टनर्स(sleeping partners) कौन होते हैं।
15 अप्रैल को अतीक और अशरफ अहमद की प्रयागराज में हुई थी हत्या
क्या होते हैं स्लीपिंग पार्टनर्स
बताया जाता है कि जब बदमाश अवैध तरीके से अकूत संपदा अर्जित करते हैं तो वे अपने पैसों के निवेश के लिए विकल्प की तलाश करते हैं। निवेश की तलाश में वो उन लोगों तक पहुंच बनाते हैं जो जमीनों की खरीद ब्रिकी या बिल्डर होते हैं। बदमाश अपने पैसों को इन्हीं लोगों के यहां निवेश करते हैं। आमतौर पर इस तरह के लोग छद्म तरीके से बदमाशों के पैसों का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें स्लीपिंग पार्टनर के तौर पर जाना जाता है।अब सवाल यह है कि आखिर अतीक-अशरफ की हत्या में स्लीपिंग पार्टनर्स की भूमिका क्या है। इसके बारे में जानकार बताते हैं दरअसल जब कोई माफिया कमजोर पड़ने लगता है कि तो स्लीपिंग पार्टनर्स उसके निवेश किए गए रुपयों- पैसों को वापस करने से बचने लगते हैं, एक तरह से हड़प करने की फिराक में जुट जाते हैं।
असद- बिल्डर के बीच बातचीत
जानकार हालिया एक ऑडियो का जिक्र करते हैं जिसमें असद(Asad Ahmed) के बेटे और एक बिल्डर के बीच की बातचीत है। असद जब बिल्डर से जेल में बंद अपने भाई उमर से मिलने के लिए कहता है तो बिल्डर की तरफ से जवाब आता है कि उसके लिए जेल या कचहरी में जाकर मिलना मुनासिब नहीं होगा। उस जवाब पर असद कहता है कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलने लगता है। जानकार कहते हैं कि अगर आप अतीक और अशरफ की हत्या को देखें तो उसके हत्यारों का संबंध किसी खास समुह से नहीं है बल्कि वे यूपी के अलग अलग जिलों के रहने वाले हैं। हत्यारों का अलग अलग जिले से होने से एक बात साफ है कि वो किसी खास गैंग से जुड़े नहीं हैं बल्कि कुछ लोगों ने उन्हें एकजुट किया।
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