Udhav-Shinde Controversy: उद्धव-शिंदे विवाद का आज भी कोई नतीजा नहीं निकला। सु्प्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी संविधान पीठ को सौंप दिया है। अब 7 जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाने के साथ उद्धव गुट के कदम को भी सही नहीं माना। आपको बता रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें।
उद्धव-शिंदे मामला
- सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने महाराष्ट्र राजनीतिक संकट पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया।
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा विवेक का प्रयोग भारत के संविधान के अनुसार नहीं था।
- सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे को राहत देने से इनकार कर दिया, अदालत ने कहा कि देखा गया है कि उद्धव सरकार ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के भरोसे ऐसा कोई संचार नहीं हुआ जिससे यह संकेत मिले कि असंतुष्ट विधायक सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं।
- राज्यपाल ने शिवसेना के विधायकों के एक गुट के प्रस्ताव पर भरोसा करके यह निष्कर्ष निकाला कि उद्धव ठाकरे अधिकांश विधायकों का समर्थन खो चुके हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के भीतर फैसला करना चाहिए था।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और अपना इस्तीफा दे दिया। इसलिए सबसे बड़े दल भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे को शपथ दिलाना राज्यपाल द्वारा उचित था।
- स्पीकर का एकनाथ शिंदे गुट के भरत गोगावले को शिव सेना का व्हिप नियुक्त करना गलत था।
- स्पीकर को सिर्फ राजनीति पार्टी द्वारा जारी किए गए व्हिप को मानना चाहिए था।
- अदालत ने शिवसेना विधायकों के एक धड़े के उस प्रस्ताव को मानने के लिए राज्यपाल को गलत ठहराया जिसमें कहा गया कि उद्धव ठाकरे के पास बहुमत नहीं रहा।
महाराष्ट्र राजनीतिक संकट मामले में सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर अध्यक्ष को समयबद्ध तरीके से फैसला देना होता है। स्पीकर को विधायकों को अयोग्य घोषित करना चाहिए। ऐसा करने से ही न्याय मिलेगा। इस सरकार को क्या नैतिक और कानूनी अधिकार है कि जब राज्यपाल, स्पीकर और व्हिप की मान्यता के खिलाफ निष्कर्ष हों तो एक मिनट और भी बने रहें?।
वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उद्धव गुट और शिंदे गुट की प्रतिक्रिया भी सामने आई है और दोनों पक्ष इसे अपने-अपने पक्ष में बता रहे हैं। संजय राउत, उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शिवसेना शिंदे समूह का व्हिप अवैध है। वर्तमान सरकार अवैध है और संविधान के खिलाफ बनाई गई है। उधर, शिवसेना (शिंदे गुट) के राहुल रमेश शेवाले ने कहा कि महाराष्ट्र में शिंदे सरकार को यह बड़ी राहत है। अब प्रदेश को स्थिर सरकार मिलेगी। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
ऐसे शुरू हुआ था संकट
शिवसेना में संकट की शुरुआत एकनाथ शिंदे द्वारा 40 विधायकों के साथ उद्धव के खिलाफ विद्रोह के ऐलान से हुआ था। जून 2022 में शिंदे ने विद्रोह किया था। विद्रोह के बाद जून 2022 बागी असम चले गए और फिर बीजेपी की मदद से सरकार बनाने का दावा पेश किया। तब उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया और एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर रोक नहीं लगाई, जिसके आदेश तत्कालीन राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने दिए थे। 4 जुलाई को एकनाथ शिंदे ने फ्लोर टेस्ट जीता था। शिंदे खेमे में गए विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग को लेकर उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
चुनाव आयोग ने अपनी ओर से शिंदे गुट को बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना का मूल धनुष और तीर चिन्ह दिया। उद्धव के गुट को मशाल का चुनाव चिह्न और नया नाम शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे दिया गया है। चुनाव आयोग ने बाद में एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना की मान्यता दे दी।
