Kerala SIR: केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार और नाम शामिल कराने की प्रक्रिया लगातार चलने वाली है, इसलिए SIR की समयसीमा बढ़ाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को उन लोगों का विवरण चुनाव आयोग को सौंपने की अनुमति दी, जो निर्धारित समय के भीतर अपना एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर पाए। चुनाव आयोग ने ऐसे प्रतिवेदनों पर विचार करने और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करने पर सहमति जताई।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
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छूटे हुए मतदाताओं का विवरण आयोग को देने की अनुमति
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि समय की कमी के कारण कई लोग अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर सके। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है, तो उसके लिए व्यवस्था मौजूद है।
चीफ जस्टिस ने कहा, “जहां भी आपको लगता है कि ऐसे लोग हैं जिन्हें अभी भी मौका या अवसर दिया जाना चाहिए, उनकी पहचान कीजिए और प्रतिनिधित्व के माध्यम से यह जानकारी चुनाव आयोग के संज्ञान में लाइए। हम आयोग से इस पर विचार करने को कहेंगे और मामले को लंबित रखेंगे।”
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन यह एक सतत प्रक्रिया है और मतदाता बाद में भी सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पर CJI ने कहा कि समयसीमा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
चुनाव आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता दातार ने याचिकाकर्ताओं की ओर से एक नोट पेश किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया है और चुनाव आयोग को इस पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल यह कहकर मामले को निष्प्रभावी नहीं बताया जा सकता कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
पीठ ने चुनाव आयोग से याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश नोट में उठाए गए तथ्यों और सवालों का भी जवाब देने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि आयोग मुख्य मामले में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करे और साथ ही नोट में उठाए गए मुद्दों पर भी अपना पक्ष रखे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
