Supreme Court Issues Summons To Samay Raina: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और चार अन्य को दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ कथित असंवेदनशील टिप्पणियों के लिए समन जारी किया है। अदालत ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पुलिस आयुक्त से रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठाकर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर की अगली सुनवाई की तारीख पर उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।
मुश्किल में फंसे समय रैना
अदालत में पेश नहीं हुए तो सख्त कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वे अदालत के समक्ष पेश होने में विफल रहते हैं, तो उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर इंडियाज गॉट लैटेंट के होस्ट समय रैना समेत पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को तलब किया। एनजीओ ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने शो में स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया।
एनजीओ की याचिका पर सुनवाई
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मुंबई के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे पांचों इंफ्लुएंसर को नोटिस जारी कर अदालत में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें, अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीठ ने एनजीओ ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की याचिका पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि से भी सहायता मांगी, जिसमें दिव्यांग लोगों और दुर्लभ विकारों से पीड़ित व्यक्तियों से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री को विनियमित करने संबंधी निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
पीठ ने ऐसे लोगों का उपहास करने वाले इंफ्लुएंसर को नुकसानदेह और मनोबल को चोट पहुंचाने वाला करार दिया और कहा कि कुछ गंभीर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि ऐसी चीजें फिर न हों। एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह से पीठ ने कहा, यह बहुत ही नुकसानदायक और मनोबल गिराने वाला है। ऐसे कानून हैं जो इन लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करते हैं और एक घटना से समूचा प्रयास निष्फल हो जाता है। आपको कानून के तहत कुछ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के बारे में सोचना चाहिए।
अधिकार की आड़ में किसी को भी नीचा दिखाने की अनुमति नहीं
पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं है और किसी को भी इस अधिकार की आड़ में किसी को भी नीचा दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने दिव्यांगों और दुर्लभ विकारों से पीड़ित लोगों से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री पर दिशानिर्देश बनाने पर विचार किया। एनजीओ ने मौजूदा कानूनी ढांचे में कमियों का हवाला देते हुए पीठ से ऑनलाइन सामग्री पर दिशानिर्देश तैयार करने का आग्रह किया था।
