सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए एक जालसाजी और मानहानि के मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को दी राहत। Pawan Khera (File/PTI)
पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी को निशाना बनाया था। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि शर्मा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी कई अघोषित संपत्तियां मौजूद हैं। इन्हीं आरोपों और बयानों को आधार बनाते हुए असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ छवि खराब करने और जालसाजी का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के औजार के तौर पर नहीं होना चाहिए।
पवन खेड़ा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 24 अप्रैल के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए मामलों से जुड़ा है, जिन्होंने खेड़ा और अन्य के विरुद्ध गुवाहाटी अपराध शाखा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
क्यों मिली अग्रिम जमानत? समझिए 5 बड़े कारण:
1. सुप्रीम कोर्ट को लगा कि मामला राजनीतिक द्वेष-विद्वेष से प्रभावित है।
2. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिली व्यक्ति की आज़ादी को बिना ठोस कारण के नहीं छीना जा सकता।
3. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले में खेड़ा की कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी नहीं है। असम पुलिस के पास
दस्तावेज पहले से हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं।
4. गंभीर अपराध का स्पष्ट आधार नहीं है और FIR में कई धाराएं जमानती हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि गैर-जमानती धाराओं का ठोस आधार अभी स्पष्ट नहीं है।
5. खेड़ा के देश छोड़कर भागने या साक्ष्य से छेड़छाड़ का खतरा नहीं दिखाई देता है। सुप्रीम कोर्ट को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि खेड़ा जांच से बचेंगे।
खेड़ा को इन शर्तों पर मिली है राहत
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के साथ सख्त शर्तें भी लगाईं जिन्हें पवन खेड़ा को मानना होगा। पहला जांच में पूरा सहयोग करना होगा और दूसरा पुलिस बुलाए तो पेश होना अनिवार्य है। खेड़ा गवाहों या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे
और बिना अदालत की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा गुवाहाटी का ट्रायल कोर्ट जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है।
असम पुलिस को भी दिए सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जांच निष्पक्ष और बिना दबाव के जारी रहेगी। कोर्ट न साफ किया कि जमानत का मतलब जांच में कोई रुकावट नहीं माना जाएगा। असम पुलिस को पूरा अधिकार है कि वह मामले की गहराई से जांच करे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपी पर ही आरोप साबित करने का बोझ डाल दिया, जो कानूनन गलत है।
गुवाहाटी हाईकोर्ट की टिप्पणी पर SC ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों का सही तरीके से आकलन नहीं किया और कुछ निष्कर्ष बिना पर्याप्त आधार के निकाले गए। खेड़ा को जमानत न देने का फैसला सहीं नहीं था।
गुवाहाटी हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों का सही तरीके से आकलन नहीं किया और कुछ निष्कर्ष बिना पर्याप्त आधार के निकाले गए। खेड़ा को जमानत न देने का फैसला सही नहीं था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश केवल जमानत तक सीमित है। मामले के मेरिट पर ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से फैसला करेगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पवन खेड़ा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने कांग्रेस नेता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने असम के मुख्यमंत्री पर कड़ा प्रहार किया। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर की पीठ के समक्ष सिंघवी ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता के विरुद्ध लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद कम है।
अभिषेक सिंघवी ने सीएम हिमंता के आचरण पर उठाए सवाल
सिंघवी ने आशंका जताई कि यदि पवन खेड़ा को गिरफ्तार किया गया, तो उनके साथ न्यायोचित बर्ताव नहीं होगा। मुख्यमंत्री की शैली पर सवाल उठाते हुए सिंघवी ने कहा कि यदि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने यह कल्पना की होती कि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति "संवैधानिक काउबॉय" या "संवैधानिक रैम्बो" की तरह आचरण करेगा, तो वे निश्चित रूप से बेचैन हो उठते।
