इंडियन मुजाहिदीन के दो ऑपरेटिव को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 12 साल से जेल में थे बंद; कहा- यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 27 जुलाई को पारित अपने आदेश में कहा कि दोनों आरोपी साल 2014 से हिरासत में हैं । तबसे मामले की सुनवाई बेहद धीमी गति से चल रही है। ऐसे में निकट भविष्य में मुकदमे के पूरा होने की कोई संभावना दिखाई नहीं देती। ऐसे में किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक मुकदमे के लंबित रहने के कारण जेल में रखना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने करीब 12 साल से जेल में बंद कथित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के ऑपरेटिव मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अज़हर को जमानत दे दी है। अदालत ने इसके लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया। फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे में असाधारण देरी और लंबे समय तक हिरासत में रखा जाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट

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2014 से हिरासत में हैं आरोपी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 27 जुलाई को पारित अपने आदेश में कहा कि दोनों आरोपी साल 2014 से हिरासत में हैं । तबसे मामले की सुनवाई बेहद धीमी गति से चल रही है। ऐसे में निकट भविष्य में मुकदमे के पूरा होने की कोई संभावना दिखाई नहीं देती। ऐसे में किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक मुकदमे के लंबित रहने के कारण जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि इसी मामले के एक सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

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