Sonam Wangchuk: प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में लगातार 26 दिनों तक चले आमरण अनशन को समाप्त करने के बाद, लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अब वापस अपने गृह क्षेत्र लद्दाख लौट रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने की राष्ट्र निर्माण की अपील (स्क्रीनग्रैब: @Wangchuk66)
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए सोनम वांगचुक ने दिल्ली से श्रीनगर के बीच शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस में अपने पहले सफर और चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल को देखने के शानदार अनुभव को साझा किया। उन्होंने भारतीय रेलवे की सराहना करते हुए इसे अपना पसंदीदा यातायात साधन बताया।
"वंदे भारत का सफर और चिनाब ब्रिज देखना गर्व की बात"
सोनम वांगचुक ने वीडियो में कहा किहम लद्दाख के लिए निकल रहे हैं तो रेलगाड़ी से निकले, जो कि मेरा सबसे पसंदीदा यातायात है। दिल्ली से श्रीनगर तक शुरू हुई वंदे भारत सेवा पर यह मेरा पहला अनुभव था और मैं चिनाब पर बने पुल को देखना चाहता था। यह बहुत ही खूबसूरत अनुभव रहा और मुझे अपनी रेल पर बहुत गर्व है। उन्होंने आगे बताया कि वे कश्मीर में एक दिन का आराम लेकर लद्दाख के लिए आगे बढ़ेंगे ताकि साफ हवा-पानी से फिर से ऊर्जा जुटा सकें।
शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों पर कार्रवाई रोकने की अपील
संसद में परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए लाए गए नए बिल पर संतोष जताते हुए वांगचुक ने कहा कि सुधार केवल परीक्षाओं तक सीमित न रहकर पूरी शिक्षा प्रणाली में होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से पुराने वादों को निभाने की अपील करते हुए कहा कि मैं सरकार से अपील करना चाहूंगा कि जो समझौते लिखित में मेरे साथ और CJP के साथ हुए थे, कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई या FIR नहीं होगी, सरकार उस पर कायम रहे। देश में और विशेषकर युवा पीढ़ी में एक भरोसे का माहौल बनाएं, ताकि सब मिलकर राष्ट्र निर्माण में जुट जाएं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक के 26 दिनों के अनशन और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। 23 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने अनशन खत्म किया था।
