कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया गुरुवार को राज्यपाल थावरचंद गहलौत से मिलेंगे। बताया जा रहा है कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद वह सीएम पद से अपना इस्तीफा उन्हें सौंप सकते हैं। राज्यपाल गहलतो ने उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे मिलने का समय दिया। अब हर कोई यही जानना चाहता है कि क्या सिद्दारमैया राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगे?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैय ने राज्यपाल से मांगा मिलने का समय
बता दें कि कर्नाटक में पिछले कई दिनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें जारी हैं। लंबे समय से चली आ रही अटकलों के बीच मंगलवार को पार्टी आलाकमान की राजधानी राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में मैराथन बैठक हुई। सीएम सुबह विधायकों के साथ नाश्ते के बाद राज्यपाल से मिलने जाएंगे। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में हुई आलाकमान की बैठक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की इस्तीफे से जुड़ी बातें भी हुईं। सूत्रों के अनुसार सिद्दारमैया जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अब जिस तरह से उन्होंने आज राज्यपाल से मिलने का समय मांगा, उसे देखते हुए लगता है कि अटकलें सही हैं और वह कल यानी गुरुवार 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को हुई कांग्रेस आलाकमान की मैराथन बैठक में शीर्ष नेतृत्व में सिद्दारमैया को अपनी इच्छा बता दी है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिद्दारमैया से अगले व्यक्ति को मौका देने की बात कही। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बताया कि पार्टी राज्य में आसान नेतृत्व परिवर्तन चाहती है।
आज जब सिद्दारमैया ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा उससे पहले उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बारे में खबर आई कि वह कल यानी गुरुवार 28 मई की सुबह सिद्दारमैया से मिलेंगे। दोनों नेताओं की नाश्ते पर बैठक होने की बात सामने आई। बता दें कि सिद्दारमैया के उत्तराधिकारी के तौर पर डीके शिवकुमार को ही देखा जा रहा है।
पहले भी डीके शिवकुमार ने कई बार पार्टी आलाकमान पर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बनाया था। मौजूदा विधानसभा की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार आमने-सामने आ गए थे। दोनों के समर्थन में अलग विधायक सामने आए थे। इसके बाद यह थ्योरी भी सामने आई थी कि दोनों नेताओं को ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। ढाई साल पूरे होने के बाद भी डीके शिवकुमार ने फिर दांव ठोका, लेकिन पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया। लगता है इस बार पार्टी ने सिद्दारमैया को हटाने का मन बना लिया है और उन्हें अपना फैसला सुना भी दिया है।
