पद्म भूषण नहीं, भारत रत्न के हकदार हैं ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन, जेएमएम का दावा

झारखंड के आदिवासी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने अपने जीवन को आदिवासियों और वंचित समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक के रूप में उन्होंने राज्य के गठन और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक बनी, जो आज भी आदिवासी आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती है।

Shibu Soren Padma Bhushan: झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण के बजाय भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म भूषण सम्मान शिबू सोरेन के योगदान के अनुरूप नहीं है और उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा जाना चाहिए। जेएमएम ने स्पष्ट किया है कि भारत रत्न की मांग आगे भी लगातार उठाई जाती रहेगी। जेएमएम के प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि शिबू सोरेन ने आदिवासियों और वंचित वर्गों के उत्थान में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और वे भारत रत्न के वास्तविक हकदार हैं।

Shibu Soren honoured with Padma Bhushan (Photo: PTI)

शिबू सोरेन को पद्म भूषण का सम्मान (फोटो: PTI)

वहीं, पार्टी की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने केंद्र सरकार को पद्म भूषण के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने भी शिबू सोरेन को गरीबों और आदिवासियों की सशक्त आवाज बताते हुए भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “पद्म भूषण का हम स्वागत करते हैं, लेकिन भारत रत्न न दिया जाना हम सभी को पीड़ा देता है। हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार हमारी भावनाओं का सम्मान करेगी।” अगस्त 2024 में 81 वर्ष की आयु में शिबू सोरेन के निधन को झारखंड की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा गया। वहीं, झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने पद्म भूषण दिए जाने को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया।

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