बांग्लादेश में बिगड़ते हालात (Bangladesh Unrest) के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने सोमवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और वह भारत आ गईं। भारत में उनके विमान को दिल्ली के पास हिंडन एयरबेस (Hidon Airbase) पर उतारा गया। देर शाम तक शेख हसीना, हिंडन एयरबेस पर ही रहीं, यहीं पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने उनसे मुलाकात की। बाद में देर शाम उन्हें हिंडन एयरबेस से एक सुरक्षित जगह पर लेकर जाया गया। यह पहला मौका नहीं है, जब शेख हसीना इस तरह से भारत में छिपी हैं। इससे पहले भी वह 1975 से 1981 तक दिल्ली के एक इलाके में छिपकर रही थीं।
लाजपत नगर में रहती थीं शेख हसीना
भागकर भारत आईं शेख हसीना
बांग्लादेश में हिंसा और बढ़ते आक्रोश के बीच शेख हसीना ने देश छोड़ दिया। वह भारत तो आ गईं, लेकिन उनके यहां से यूनाइटेड किंगडम जाने की बातें भी कही जा रही हैं। शेख हसीना ने सोमवार साम अपनी बहन के साथ गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर लैंड किया। जिस तरह से शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ा और भारत आ गईं, उससे एक बार फिर 1975 की यादें ताजा हो गईं। उस समय शेख हसीना ने भारत में शरण मांगी थी।क्या हुआ था 1975 में
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के इशारे पर भारत में आपातकाल (Emergency) लागू कर दी गई थी। हालात पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी अच्छे नहीं थे। अभी बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी मिले करीब साढ़े 3 साल ही हुए थे, कि वहां एक बार फिर हालात बिगड़ने लगे। बांग्लादेश को पाकिस्तान (Pakistan) के चंगुल से छुड़ाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) जो उस समय राष्ट्रपति थे, के खिलाफ रोष बढ़ने लगा। उन पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगने लगे। इसी बीच 15 अगस्त 1975 की सुबह बांग्लादेश सेना के कुछ जूनियर अधिकारी उनके घर पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी। इस गोलीबारी में मुजीबुर रहमान के साथ ही उनकी पत्नी, तीन बेटे, बहुएं और बच्चों सहित कुल 18 लोग मारे गए। लेकिन उस नरसंहार में शेख हसीना और उनकी बहन बच गईं। इसके बाद पूरे देश में हालात बेकाबू हो गए और सैन्य शासन लगाना पड़ा था।शेख हसीना ने भारत में शरण ली
1975 में उस समय शेख हसीना ने अपने पति, बच्चों और बहन के साथ भारत में शरण ली। वह किसी अन्य नाम से दिल्ली के पंडारा रोड इलाके में 1975 से 1981 तक 6 साल रहे। दरअसल शेख हसीना उस नरसंहार के समय अपने पति MA वाजेद मिया के साथ पश्चिमी जर्मनी में थीं और उनके पास भारत में शरण लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। शेख हसीना को आज भी वह समय याद है और वह कई बार उसका जिक्र करती हैं। वह बताती हैं कि कैसे उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तुरंत संदेश भेजा था कि वह उन्हें सुरक्षा और शरण देना चाहती हैं। वह कहती हैं उस समय हमारे दिमाग में यही चल रहा था कि अगर हम दिल्ली गए तो वहां से अपने देश जाना आसान होगा। हमें यह भी पता चल सकेगा कि परिवार के कितने लोग जिंदा हैं।ये भी पढ़ें - जब राष्ट्रपति रहते हुए शेख हसीना के पिता की आर्मी अफसरों ने हत्या कर दी थी, जानें पूरा किस्सा
