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US में पूछा-'ऑपरेशन सिंदूर' नाम क्यों? शशि थरूर ने अपने जवाब से लाजवाब कर दिया, Video

यह पूछे जाने पर कि भारत ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम क्यों चुना, कांग्रेस सांसद ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर, वास्तव में, मुझे लगा कि यह एक शानदार नाम है। सिंदूर, अगर कुछ अमेरिकी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो यह सिंदूर हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं अपनी मांग में लगाती है। यह व्यापक रूप से प्रचलित है।

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वाशिंगटन डीसी में शशि थरूर।

Shashi Tharoor : कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुवाई वाला सर्वदलीय शिष्टमंडल इस समय अमेरिका में है। वाशिंगटन डीसी में एक कार्यक्रम के दौरान थरूर से पूछा गया कि आखिर भारत सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए अपने अभियान का नाम 'ऑपरेशन सिंदूर' क्यों रखा? इस सवाल पर कांग्रेस नेता ने बेहद ही नपे-तुले शब्दों में सटीक जवाब देकर वहां मौजूद लोगों को लाजवाब कर दिया। थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम देने की वजह बताई। उन्होंने कहा कि 'आतंकियों ने हिंदू महिलाओं के माथे से सिंदूर पोछा था। हमले के बाद एक भावना यह भी थी कि सिंदूर का बदला लेना है। चूंकि सिंदूर का रंग भी लाल और रक्त भी लाल होता है। इसलिए कुछ लोगों ने कहा कि खून का बदला खून से लिया जाएगा।'

विवाहित महिलाएं हर दिन सिंदूर लगाती हैं-थरूर

यह पूछे जाने पर कि भारत ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम क्यों चुना, कांग्रेस सांसद ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर, वास्तव में, मुझे लगा कि यह एक शानदार नाम है। सिंदूर, अगर कुछ अमेरिकी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो यह सिंदूर हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं अपनी मांग में लगाती है। यह व्यापक रूप से प्रचलित है। कुछ गैर-हिंदू भी इसे करते हैं। सिंदूर विवाह समारोह के समय लगाया जाता है और उसके बाद हर दिन विवाहित महिलाएं इसे लगाती हैं। इसलिए, हम इन क्रूर आतंकवादियों के बारे में बहुत सचेत थे, जिन्होंने पति को उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने गोली मार दी। आतंकियों ने महिलाओं को छोड़ दिया और जब एक पत्नी चिल्लाई, 'मुझे भी मार दो', तो उसे कहा गया, नहीं, 'तुम वापस जाओ और उन्हें बताओ कि हमने क्या किया है।' इसी कारण से महिलाएं इस जघन्य, वीभत्स कृत्य से बच गईं।"

हिंदी में कहावत है-'खून का बदला खून'

वाशिंगटन डीडी के नेशनल प्रेस क्लब में थरूर ने कहा, 'हिंदू परंपरा में शादी के बाद महिलाएं सुहाग के प्रतीक के रूप में अपने माथे पर सिंदूर लगाती हैं। यह शादी की पवित्रता का प्रतीक है और इसका एक भावनात्मक रिश्ता होता है। क्रूर आतंकियों ने 26 महिलाओं के माथे से सिंदूर मिटाया। इसलिए हम सिंदूर पोछे जाने का बदला लेना चाहते थे।' थरूर ने आगे कहा कि 'हिंदी में कहावत है खून का बदला खून। लेकिन भारत ने सिंदूर का बदला खून से लिया। सिंदूर के साथ उन्होंने जो किया उसका बदला खून से लिया गया।'

'सबसे पहले सिंदूर मिटाने की घटना का बदला लेना चाहते थे'

थरूर ने आगे कहा कि उस सिंदूर को वास्तव में 26 भारतीय महिलाओं के माथे से मिटा दिया गया था, मैं हिंदू महिलाएं कहने वाला था, लेकिन उनमें से एक वास्तव में ईसाई थी, लेकिन बाकी सभी के माथे का सिंदूर इन आतंकवादी घटना में मिटा दिया गया। इसलिए हम सबसे पहले सिंदूर मिटाने की उस घटना का बदला लेना चाहते थे। लेकिन, दूसरी बात, यह कोई संयोग नहीं है कि सिंदूर का रंग लाल है, जो खून के रंग से बहुत अलग नहीं है, और कई मायनों में एक हिंदी मुहावरा है कि 'खून का बदला खून'; यहां यह 'सिंदूर का बदला खून' होगा, यानी सिंदूर के साथ जो कुछ भी किया गया है, उसके जवाब में खून।"

सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया

बता दें कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ब्राजील की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद अमेरिका पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देना है। भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे। पीड़ितों में 25 भारतीय नागरिक और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। इसके जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

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Alok Rao
आलोक कुमार राव author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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