CJI Chandrachud Singh: सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता दिए जाने संबंधी याचिकाओं की सुनवाई से भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को हटाए जाने की अर्जी बुधवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ समलैंगिक विवाह को मान्यता संबंधी याचिकाओं पर आज नौवें दिन सुनवाई कर रही थी।
जस्टिस चंद्रचूड़
वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश अंसन थॉमस नामक एक व्यक्ति ने सीजेआई को 13 मार्च और 17 अप्रैल को भेजे अपने पत्रों का हवाला दिया और कहा कि न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए। सीजेआई ने कहा, धन्यवाद, श्रीमान थॉमस, अर्जी खारिज की जाती है।
संविधान पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस. आर. भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई को सुनवाई से हटाने संबंधी दलीलों पर आपत्ति जताई। इस मामले में सुनवाई जारी है।
सरकार का रुख
26 अप्रैल को सुनवाई में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह समलैंगिक विवाहों को कानूनी मंजूरी देने की मांग करने वाली याचिकाओं में उठाए गए सवालों को संसद के लिए छोड़ देने पर विचार करे। केंद्र की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि शीर्ष न्यायालय एक बहुत ही जटिल मुद्दे से निपट रहा है, जिसका गहरा सामाजिक प्रभाव है।
उन्होंने न्यायमूर्ति एस. के. कौल, न्यायमूर्ति एस.आर. भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ से कहा कि कई अन्य विधानों पर भी इसका अनपेक्षित प्रभाव पड़ेगा, जिस पर समाज में और विभिन्न राज्य विधानमंडलों में चर्चा करने की जरूरत होगी।
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