राघव चड्ढा के सात सांसदों संग अचानक आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने से शुरू हुआ सियासी तूफान बढ़ता ही जा रहा है। अब आम आदमी पार्टी ने सोमवार को कहा कि अगर उसके सात पूर्व सांसदों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित नहीं किया गया तो वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह (फोटो साभार: @SanjayAzadSln)
भाजपा में विलय को किया गया स्वीकार
बता दें कि आज राज्यसभा के सभापति ने इन सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। जिसके बाद अब राज्यसभा में 113 सांसद हो गए हैं और आप के 10 सांसदों में से तीन रह गए हैं। सभापति के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि उन सात सांसदों ने भाजपा में अपने विलय को मान्यता देने के लिए पत्र दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।
हमारी आपत्तियों को सुना ही नहीं गया
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की आपत्तियों और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी अयोग्यता की मांग पर कोई विचार नहीं किया गया। संजय सिंह ने कहा कि सभापति ने उन सात सांसदों के पत्र पर संज्ञान लिया और उसी के आधार पर उनके विलय को स्वीकार कर लिया। लेकिन हमारी आपत्तियों और दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की हमारी मांग पर कोई विचार ही नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि जब उनके पत्र पर विचार किया जाएगा,तो सभापति संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में फैसला लेते हुए उन सात सदस्यों को अयोग्य ठहराएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है,तो हम अदालत जाएंगे। इस तरह से किसी पार्टी को तोड़ना गलत है।
गौरतलब है कि इससे पहले संजय सिंह ने रविवार को राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सात सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि उनका कदम संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन है।
सात सांसदों ने एक साथ छोड़ दी थी पार्टी
बीते शुक्रवार को आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका तब लगा था जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा,अशोक मित्तल,संदीप पाठक,हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता,विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने आप को छोड़ दिया था और वे भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और बुनियादी नैतिकता से भटक गई है।
