Rajya Sabha Deputy Chairman Election: राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है और अगर सरकार तथा विपक्ष के बीच आम सहमति बनती है, तो आगामी 16 अप्रैल को उपसभापति का चुनाव कराया जा सकता है।
16 अप्रैल को राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव कराया जा सकता है। ANI
सत्ता पक्ष की ओर से विपक्षी दलों के साथ संवाद और तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू, जेपी नड्डा और पीयूष गोयल को सौंपी गई है। ये दिग्गज नेता लगातार विपक्षी खेमे से संपर्क साध रहे हैं ताकि सदन में उपसभापति के चयन को लेकर एक राय बनाई जा सके।
हरिवंश नारायण सिंह हो सकते हैं सरकार की प्रथमिकता
सरकार की प्राथमिक कोशिश हरिवंश नारायण सिंह के नाम पर ही आम सहमति बनाने की है, जिससे चुनाव की नौबत न आए और निर्विरोध चयन का रास्ता साफ हो सके।
हालांकि, यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाती है, तो ऐसी स्थिति में 17 अप्रैल को चुनाव होना तय माना जा रहा है। इस बीच, विपक्षी खेमा भी अपनी रणनीति को धार देने में जुटा है और 15 अप्रैल को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में विपक्ष अपना स्टैंड स्पष्ट करेगा कि वे सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे।
बता दें कि हाल ही में राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह मनोनीत सांसद बने। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को अपने कक्ष में शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया था।
हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। उनकी पार्टी JDU ने इस बार नाम नहीं दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका मनोनयन किया।
रंजन गोगोई की सीट पर बने सांसद
पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद सीट खाली हुई थी। इसे भरने के लिए जदयू के हरिवंश को चुना गया। 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे।
बताते चलें कि राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति तय करते हैं। इन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।
