राजस्थान हाई कोर्ट ने खुद को भगवान मानने वाले आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी है। मंगलवार को PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उनकी पैरोल अर्जी को खारिज करने के अपने फैसले को सही साबित नहीं कर पाई, जबकि पहले उन्हें मिली अंतरिम रिहाई के दौरान उनका व्यवहार अच्छा रहा था और वे जेल में 13 साल से ज़्यादा समय बिता चुके हैं।
आसाराम (फाइल फोटो)
कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की डिवीज़न बेंच ने सोमवार को यह आदेश दिया। बेंच ने आसाराम को उनकी पहली रेगुलर पैरोल दी और 50,000 का पर्सनल बॉन्ड और 25,000-25,000 की दो जमानत भरने के बाद उन्हें 20 दिन के लिए रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने अच्छे व्यवहार का हवाला दिया
कोर्ट ने कहा कि जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद रेप के दोषी आसाराम जेल में 13 साल, एक महीना और 24 दिन बिता चुके हैं।कोर्ट ने देखा कि उन्हें पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिली थी और उस दौरान ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन करने, भागने की कोशिश करने, गवाहों को प्रभावित करने या कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
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राज्य सरकार ने पैरोल का विरोध किया
राज्य सरकार ने आसाराम की पैरोल का विरोध करते हुए हाई कोर्ट से कहा कि रिहा होने पर वे भाग सकते हैं। सरकार ने राजस्थान के बाहर लंबित आपराधिक मामलों और गुजरात में दोषी ठहराए जाने का हवाला देते हुए पैरोल न देने की बात कही। सरकार ने यह भी कहा कि उनका मेडिकल इलाज चल रहा है, उन्हें पैरोल के लिए मेडिकल रूप से फिट घोषित नहीं किया गया है और उनकी रिहाई से पीड़ित परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज किया
हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की यह चिंता कि आसाराम भाग सकते हैं या खतरा पैदा कर सकते हैं, सिर्फ़ अटकलों पर आधारित है और इसके लिए कोई सबूत नहीं है।कोर्ट ने यह भी कहा कि आसाराम की पैरोल अर्जी पर 'राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज़ ऑन पैरोल रूल्स' के तहत फैसला लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरे राज्यों में लंबित मामलों या दोषी ठहराए जाने को इस मामले में पैरोल न देने का आधार नहीं बनाया जा सकता।इससे पहले, 27 मई को हाई कोर्ट ने 2013 के नाबालिग रेप मामले में आसाराम की सज़ा और उम्रकैद को बरकरार रखा था।
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मेडिकल आधार पर जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आसाराम की मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की अर्ज़ी पर भी सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि एम्स के मेडिकल पैनल ने कहा है कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें चौबीसों घंटे मेडिकल मदद की जरूरत है। जस्टिस एम एम सुंदरेश और पी बी वराले की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तारीख तय की।
