भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान आगमन के साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। लाख कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच तल्खी देखने को मिली। फिर चाहे वह झालावाड़ में मंच से पायलट का नाम न लिया जाना हो या यात्रा के पहले ही सुबह राहुल गांधी के साथ गहलोत और पायलट का एक साथ यात्रा में शामिल न होना हो। वैसे, संगठन महासचिव वेणुगोपाल और मीडिया चेयरमैन जयराम रमेश इस गुटबाजी और तल्खी को ढंकने के पूरे प्रयास करते नजर आए।
राजस्थान पहुंचते ही गहलोत और पायलट को खींचतान से ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी को नीति और नीयत की वजह से भारत के टूटने का खतरा बढ़ रहा है। मोदी की विचारधारा विभाजनकारी है। उनकी वजह से राजनीति में तानशाही प्रवृति बढ़ रही है। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा का मकसद चुनावी फायदा उठाना नहीं है। हालांकि, चुनावी जानकारों का कहना है कि उन्हें और कांग्रेस को इसका राजनीतिक लाभ जरूर मिलेगा।
गहलोत ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा राहुल गांधी के लिए 'एसेट' साबित होगी। युवा बेरोजगारी से परेशान हैं। समय रहते केंद्र बेरोजगारी और महंगाई को काबू करे। यात्रा ऐसे वक्त पर हो रही है, जब पूरा देश चिंतित है। आम आदमी यात्रा का साथ दे रहा है। गहलोत ने पीएम की ओर से गुजरात चुनाव में वोटिंग के बाद प्रधानमंत्री के रोड शो को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि 2017 में भी पीएम मोदी ने यही किया था। चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है।
बहरहाल, सियासी आरोप-प्रत्यारोप ऐसे ही चलता रहेगा। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की चुनौती बीजेपी से लड़ने से ज्यादा अपनी अंदरूनी गुटबाजी को काबू करने की है। गहलोत-पायलट एक साथ यात्रा में गांधी के साथ नहीं चले। इस से ज्यादा इसका प्रमाण और कुछ नहीं हो सकता। यात्रा के पहले दिन सुबह गहलोत गांधी के साथ लगभग दो किमी चले। फिर जब वह यात्रा से अलग हुए तब पायलट राहुल के साथ यात्रा में नजर आए।
वैसे, केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं और उनके समर्थकों को बार-बार आगाह किया है कि उनकी आपसी गुटबाजी का असर यात्रा में नहीं दिखना चाहिए। साथ ही कांग्रेस के मीडिया विभाग ने सभी नेताओं को मीडिया से दूरी बनाकर और राजस्थान को लेकर कोई भी टीका-टिप्पणी करने से मना कर रखा है।
कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान में यात्रा को बिना किसी बवाल के निकालने की होगी। सूत्रों की मुताबिक, नेतृत्व ने इसकी जिम्मेदारी संगठन महासचिव वेणुगोपाल और भंवर जितेंद्र सिंह को दी है। रमेश को मीडिया से नेताओं की दूरी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है। अब देखना होगा अंदरूनी कलह के ज्वालामुखी पर बैठी कांग्रेस पार्टी राजस्थान से बिना किसी विस्फोट के कैसे निकलती है। सफर लंबा है और खतरा दोनों ओर है।
