गैर-सहवास पर महिलाओं के तलाक के अधिकार को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(2)(3) केवल पत्नी को तलाक मांगने का अधिकार देती है, जहां पति के खिलाफ भरण-पोषण के आदेश के एक वर्ष या उससे अधिक समय तक सहवास फिर से शुरू नहीं हुआ है।

उच्चतम न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके तहत यदि पति के खिलाफ भरण-पोषण का आदेश होने के बाद भी एक साल या उससे अधिक समय तक पति-पत्नी साथ नहीं रहते, तो केवल पत्नी को ही तलाक मांगने का अधिकार दिया गया है।

High Court

सांकेतिक फोटो

पीठ ने कहा, 'जनहित याचिकाओं के माध्यम से निजी दुश्मनी निभाने की कोशिश मत कीजिए।' प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विधि के छात्र जितेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। सिंह ने मामले की स्वयं पैरवी की और उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक संबंधी प्रावधानों की 'लैंगिक-तटस्थ' व्याख्या का अनुरोध किया था।

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