Pakistan News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POK) के रावलकोट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। खैगला बर्मा ब्रिज के पास विरोध-प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में एक प्रमुख प्रदर्शनकारी नेता की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हिंसक कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता (फोटो- AP&X)
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अस्पताल के बाहर प्रदर्शन
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी फोर्स की इस बर्बर गोलीबारी में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मौके पर ही मौत हो गई। शाहजैब हबीब इलाके में नागरिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए चल रहे आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा थे।
इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों ने शाहजैब हबीब के शव को रावलकोट के 'कमांड मिलिट्री हॉस्पिटल' (CMH) के ठीक बाहर रख दिया है। अस्पताल के बाहर हजारों की संख्या में लोग एकत्र हैं और पाकिस्तानी सेना व प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
कई टॉप लीडर्स गिरफ्तार
नागरिकों पर फायरिंग की इस हिंसक घटना के बाद पाकिस्तानी प्रशासन ने आंदोलन को कुचलने के लिए देर रात एक बड़ा धरपकड़ अभियान चलाया। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने रात के अंधेरे में छापेमारी करते हुए 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के कई शीर्ष नेताओंको गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर भेज दिया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई का मकसद क्षेत्र में उठने वाली विरोध की आवाजों को दबाना है।
क्षेत्र में क्यों उबला है आक्रोश?
कब्जे वाले इस क्षेत्र में पिछले काफी समय से बिजली के भारी बिलों, आटे की किल्लत, सब्सिडी खत्म किए जाने और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले विशाल जनआंदोलन चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल लगातार लाठीचार्ज, आंसू गैस और अब सीधे फायरिंग जैसे हिंसक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रावलकोट में हुई इस ताजा घटना ने जलते हुए घाव पर नमक का काम किया है। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओजेके में पाकिस्तानी सेना द्वारा आम नागरिकों पर ढाए जा रहे इस जुल्म का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। फिलहाल क्षेत्र में भारी सुरक्षा बल तैनात है, लेकिन जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
